
नई दिल्ली, 28 मार्च।
रुपए में गिरावट को रोकने और सट्टेबाजी (स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग) पर लगाम लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों को नया निर्देश दिया है।
आरबीआई ने अधिकृत डीलर के रूप में काम करने वाले बैंकों से कहा है कि वे दिन के अंत तक रुपए में अपनी ओपन पोजीशन 100 मिलियन डॉलर तक सीमित रखें।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अमेरिकी-ईरान और इजरायल के बीच तनाव के कारण व्यापार घाटा बढ़ा है और रुपए पर दबाव बढ़ गया है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि सभी कमर्शियल बैंक इस रोजाना लिमिट को 10 अप्रैल तक लागू करें और जरूरत पड़ने पर बाजार की स्थिति के अनुसार इसे बदला जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रुपए में गिरावट जारी रहती है तो RBI और भी सख्त कदम उठा सकता है। रुपए को सहारा देने के लिए RBI ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) का काफी इस्तेमाल किया है, जिससे उसकी हस्तक्षेप करने की क्षमता कुछ सीमित हो गई है।
शुक्रवार को रुपया पहली बार 94 प्रति डॉलर के नीचे गया और करीब 1 प्रतिशत गिरा। अमेरिकी-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक इसमें कुल मिलाकर 4 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है।
ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है, जो RBI के अक्टूबर में तय किए गए 70 डॉलर के अनुमान से काफी ज्यादा है। इससे भारत का आयात बिल बढ़ा है और महंगाई व मुद्रा संतुलन बनाए रखना RBI के लिए मुश्किल हो गया है।
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट के अनुसार, रुपया आने वाले समय में सुधरकर करीब 91 प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है। साथ ही, 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड मौजूदा 6.83 प्रतिशत से घटकर करीब 6.65 प्रतिशत तक आ सकती है। सामान्य स्थिति आने में 2-3 महीने लग सकते हैं।
एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि ईंधन की कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था अभी स्थिर बनी हुई है, लेकिन कच्चे तेल की कीमतें आगे भी देश के बाहरी संतुलन को प्रभावित करेंगी। अगर वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें लगातार बढ़ती हैं, तो इससे भारत का चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ सकता है और इसका असर आर्थिक विकास और महंगाई पर भी पड़ सकता है।
