प्रस्तावना

दक्षिण एशिया की राजनीति हमेशा से उतार-चढ़ाव और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा का केंद्र रही है। 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के बाद से ढाका और इस्लामाबाद के संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। लेकिन हाल के दिनों में, जब बांग्लादेश में शेख हसीना की सत्ता का अंत हुआ और मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार सत्ता में आई, तब से दोनों देशों के रिश्तों में अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिल रहा है।
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) से इतर बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मुलाकात इस बात का संकेत देती है कि क्षेत्रीय राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर रही है।
यूनुस और शहबाज शरीफ की मुलाकात
मुलाकात का संदर्भ
- न्यूयॉर्क में हुई बैठक में व्यापार और आर्थिक सहयोग पर गहन चर्चा हुई।
- यह यूनुस और शरीफ के बीच दूसरी मुलाकात थी, जबकि पहली बैठक पिछले साल आयोजित हुई थी।
- मुख्य सलाहकार के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने कहा कि दोनों नेताओं की बातचीत बेहद रचनात्मक रही।
मुलाकात का महत्व
इस बैठक को केवल औपचारिक वार्ता नहीं बल्कि एक रणनीतिक संकेत माना जा रहा है।
- पाकिस्तान, बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद तुरंत सक्रिय हुआ है।
- शेख हसीना के दौरान जो तनावपूर्ण रिश्ते थे, अब वे अपेक्षाकृत सहज होते दिख रहे हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1971 के जख्म और रिश्तों की दीवार
बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच संबंधों की सबसे बड़ी बाधा 1971 का युद्ध और नरसंहार रहा है।
- बांग्लादेश लगातार पाकिस्तान से माफी और मुआवजे की मांग करता रहा।
- लाखों लोगों की हत्या और हजारों महिलाओं पर अत्याचार का मुद्दा दोनों देशों के रिश्तों में अटका रहा।
- संसाधनों की वापसी और युद्ध अपराधों के मुकदमे भी इस तनाव का हिस्सा रहे।
पाकिस्तान का नया रुख
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने हाल ही में ढाका का दौरा किया।

- यह पिछले 13 वर्षों में किसी पाकिस्तानी अधिकारी की पहली आधिकारिक यात्रा थी।
- डार ने दावा किया कि “1971 के मुद्दे को दो बार सुलझाया जा चुका है,” लेकिन ढाका ने इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया।
यूनुस सरकार के आने के बाद का बदलाव
अगस्त 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार बनी।
- इस बदलाव ने ढाका और इस्लामाबाद के बीच संवाद का रास्ता खोला।
- पाकिस्तान ने इसे अवसर के रूप में देखा और तेजी से नजदीकियां बढ़ानी शुरू कीं।
राजनीतिक अस्थिरता और चुनौतियां
- बांग्लादेश अगले साल होने वाले चुनाव से पहले अनिश्चितता और राजनीतिक टकराव से गुजर रहा है।
- जिन दलों ने अवामी लीग सरकार को हटाने में यूनुस का साथ दिया था, वे अब आपस में भिड़ रहे हैं।
- यह स्थिति पाकिस्तान के लिए एक कूटनीतिक अवसर पैदा कर रही है।
यूनुस की अंतरराष्ट्रीय सक्रियता
न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान यूनुस ने केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि अन्य देशों के नेताओं से भी मुलाकात की।
- इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी
- फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब
- कोसोवो की राष्ट्रपति वजोसा उस्मानी
इन मुलाकातों का संदेश
- फिनलैंड और इटली ने बांग्लादेश में लोकतांत्रिक परिवर्तन और चुनावों के समर्थन का आश्वासन दिया।
- यूनुस की कोशिश है कि बांग्लादेश को वैश्विक मंच पर स्थिर और लोकतांत्रिक रूप से उभरते राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत किया जाए।
दक्षिण एशियाई राजनीति पर प्रभाव
भारत की चिंताएं
- भारत और बांग्लादेश के संबंध पारंपरिक रूप से घनिष्ठ रहे हैं।
- लेकिन पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकियां नई कूटनीतिक चुनौतियां पैदा कर सकती हैं।
क्षेत्रीय समीकरण
- पाकिस्तान अपने अलगाव को तोड़कर बांग्लादेश में नया स्थान बनाने की कोशिश कर रहा है।
- बांग्लादेश भी वैश्विक समर्थन पाने के लिए संतुलन साध रहा है।
- इससे साउथ एशियन जियोपॉलिटिक्स में नए समीकरण उभर सकते हैं।
निष्कर्ष
शेख हसीना की सत्ता जाने के बाद बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच जो नजदीकियां बढ़ रही हैं, वे केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं हैं। यह दक्षिण एशिया की राजनीति और शक्ति संतुलन के लिए भी बड़ा संकेत है।
- यूनुस और शरीफ की मुलाकात दोनों देशों के रिश्तों के नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है।
- 1971 के मुद्दे अब भी अधूरे हैं, लेकिन कूटनीतिक पहलें रिश्तों को बदल सकती हैं।
- बांग्लादेश के राजनीतिक भविष्य और पाकिस्तान की रणनीति पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
अंततः, यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले महीनों में ढाका-इस्लामाबाद रिश्ते पूरे क्षेत्र की राजनीति को प्रभावित करेंगे।
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