महज 3 साल 9 माह की उम्र में भोपाल की जुड़वां बहनें सान्वी और समन्वी नाहर ने दुनिया की सबसे कम उम्र की फीमेल ड्रमर बनकर इतिहास रच दिया। वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन में नाम दर्ज होने के बाद दोनों को ब्रिटिश संसद के हाउस ऑफ कॉमंस में सम्मानित किया गया।

भोपाल: जिस उम्र में अधिकांश बच्चे ठीक से पेंसिल पकड़ना और अक्षर लिखना सीखते हैं, उसी उम्र में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की जुड़वां बहनें सान्वी नाहर और समन्वी नाहर अपनी ड्रमिंग प्रतिभा से पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। महज 3 वर्ष 9 माह की उम्र में दोनों बहनों ने ‘यंगेस्ट फीमेल ड्रमर’ का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कर इतिहास रच दिया है।
इस असाधारण उपलब्धि के लिए दोनों बच्चियों का नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन (यूके) में दर्ज किया गया है। इतना ही नहीं, उन्हें ब्रिटेन की संसद हाउस ऑफ कॉमंस में आयोजित एक विशेष समारोह में सम्मानित भी किया गया, जहां उन्हें प्रमाण-पत्र, मेडल और ट्रॉफी प्रदान की गई।
1 मिनट 20 सेकंड की शानदार प्रस्तुति से बनाया रिकॉर्ड
सान्वी और समन्वी ने 21 मार्च 2026 को ड्रम सेट पर निर्धारित संगीत ट्रैक को महज 1 मिनट 20 सेकंड में सफलतापूर्वक पूरा कर यह विश्व रिकॉर्ड बनाया। रिकॉर्ड सत्यापित होने के बाद उनकी उपलब्धि को संस्था के आधिकारिक प्रकाशनों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी दर्ज किया गया।
यह उपलब्धि न केवल भोपाल बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय बन गई है।
सवा तीन साल की उम्र से शुरू किया ड्रम सीखना
दोनों बच्चियों की मां डॉ. निकिता नाहर ने बताया कि ड्रमिंग दुनिया के सबसे जटिल वाद्य यंत्रों में से एक मानी जाती है। आमतौर पर बच्चों को पांच वर्ष की आयु के बाद ही ड्रम सीखने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसमें दोनों हाथों और दोनों पैरों के बीच बेहतरीन तालमेल की आवश्यकता होती है। डॉ. निकिता नाहर का कहना है कि यदि बच्चों की रुचि को समय रहते पहचान लिया जाए और उन्हें सही मार्गदर्शन व निरंतर प्रोत्साहन मिले, तो वे छोटी उम्र में भी असंभव लगने वाली उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।
लेकिन सान्वी और समन्वी ने महज सवा तीन साल की उम्र में ड्रम सीखना शुरू कर दिया। नियमित अभ्यास, अनुशासन और संगीत के प्रति गहरी रुचि ने कुछ ही महीनों में उन्हें विश्व रिकॉर्ड तक पहुंचा दिया। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। सही दिशा, निरंतर अभ्यास और परिवार का सहयोग बच्चों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में निखरी प्रतिभा
बच्चियों के माता-पिता उन्हें ड्रम सिखाने के लिए कई संगीत शिक्षकों के पास पहुंचे, लेकिन लगभग सभी ने यह कहते हुए मना कर दिया कि इतनी छोटी उम्र में ड्रम सीखना संभव नहीं है। ऐसे में भोपाल की योगी म्यूजिक वैली एकेडमी के ड्रम प्रशिक्षक युग (योग) नामदेव ‘योगी’ ने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया।
उन्होंने बच्चियों को बिल्कुल शुरुआती स्तर से प्रशिक्षण देना शुरू किया। दो महीने में दोनों ने ड्रम की मूल बीट्स पर पकड़ बना ली। इसके बाद एक स्कूल कार्यक्रम में उनकी प्रस्तुति ने सभी को चौंका दिया। यहीं से उनके प्रदर्शन का वीडियो वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स तक पहुंचा और रिकॉर्ड की प्रक्रिया शुरू हुई। दोनों बहनों ने प्रशिक्षक युग नामदेव के मार्गदर्शन में ड्रमिंग की बारीकियां सीखीं। लगातार अभ्यास और सही तकनीक की बदौलत उन्होंने बेहद कम उम्र में वह मुकाम हासिल किया, जिसे बड़े-बड़े कलाकार भी वर्षों की मेहनत के बाद हासिल कर पाते हैं।
ब्रिटिश संसद में मिला सम्मान
विश्व रिकॉर्ड बनने के बाद दोनों बच्चियों को ब्रिटिश संसद के हाउस ऑफ कॉमंस में आयोजित सम्मान समारोह में आमंत्रित किया गया। यहां उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन की ओर से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके परिवार और पूरे भारत के लिए गर्व का क्षण बन गया।
पूरे देश के लिए गर्व
सान्वी और समन्वी की यह उपलब्धि केवल एक विश्व रिकॉर्ड नहीं, बल्कि उन लाखों बच्चों और अभिभावकों के लिए प्रेरणा है, जो अपने बच्चों की प्रतिभा को नई पहचान दिलाने का सपना देखते हैं। इतनी कम उम्र में विश्व मंच पर भारत का नाम रोशन कर इन जुड़वां बहनों ने यह साबित कर दिया कि समर्पण और मेहनत के आगे उम्र कोई मायने नहीं रखती।
