रेलवे कर्मचारियों को मिल सकता है बड़ा बोनस! 🚆💰 यूनियनों ने 18,000 रुपये बेसिक पर 78 दिनों के बोनस की गणना की मांग उठाई।

त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले रेलवे कर्मचारियों के लिए बोनस को लेकर एक बड़ी मांग सामने आई है। रेलवे यूनियनों ने सरकार से प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) की गणना का आधार बढ़ाने की मांग की है। यूनियनों का कहना है कि जब 7वें वेतन आयोग के बाद न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपये हो चुका है, तो बोनस की गणना आज भी पुराने 7,000 रुपये के आधार पर क्यों की जा रही है….? इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने इस मामले को लेकर वित्त मंत्री और रेल मंत्री को पत्र लिखा है। एसोसिएशन ने नॉन-गजेटेड रेलवे कर्मचारियों के लिए बोनस की वेतन सीमा को बढ़ाने की मांग की है।
अभी कैसे तय होता है रेलवे कर्मचारियों का बोनस….?
रेलवे के नॉन-गजेटेड कर्मचारियों को हर साल 78 दिनों के बराबर प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस दिए जाने की व्यवस्था रही है। लेकिन इसकी गणना के लिए अभी भी 6वें वेतन आयोग के समय तय की गई 7,000 रुपये की वेतन सीमा का इस्तेमाल किया जाता है। यूनियन का कहना है कि इतने वर्षों में कर्मचारियों के वेतन ढांचे में बड़ा बदलाव हो चुका है, लेकिन बोनस की गणना की सीमा में उसी अनुपात में बदलाव नहीं हुआ है। मौजूदा व्यवस्था के तहत अधिकतम बोनस करीब 17,951 रुपये तक बनता है। रेलवे यूनियनों को यही व्यवस्था अब पुरानी और कर्मचारियों के हितों के खिलाफ लग रही है।
18,000 रुपये बेसिक पर हो बोनस की गणना…..
IRTSA की प्रमुख मांग है कि बोनस की गणना के लिए न्यूनतम 18,000 रुपये बेसिक पे को आधार बनाया जाए। इसके साथ महंगाई भत्ते यानी DA को भी गणना में शामिल करने की मांग की गई है। यूनियन का तर्क है कि 7वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद केंद्रीय कर्मचारियों के न्यूनतम मूल वेतन में बढ़ोतरी होकर 18,000 रुपये हो गई है। ऐसे में बोनस की सीमा को पुराने 7,000 रुपये पर बनाए रखना तर्कसंगत नहीं है। एसोसिएशन ने लेवल-1 के कर्मचारियों के लिए बोनस की सीमा को कम से कम 18,000 रुपये बेसिक और DA के आधार पर तय करने की मांग की है।
अगर मांग मानी गई तो कितना फायदा होगा….?
यूनियनों की मांग स्वीकार होने पर रेलवे के पात्र कर्मचारियों को मिलने वाले बोनस में बड़ा अंतर आ सकता है। उपलब्ध गणना के मुताबिक, अगर सरकार सिर्फ 18,000 रुपये के बेसिक पे को आधार मानकर 78 दिनों के बोनस की गणना करती है, तो राशि करीब 46,159 रुपये से अधिक हो सकती है। वहीं, अगर गणना में DA को भी शामिल किया जाता है तो बोनस की रकम में और बढ़ोतरी हो सकती है। इसी वजह से रेलवे कर्मचारियों की नजर अब सरकार के फैसले पर टिकी हुई है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये संभावित गणनाएं हैं। अंतिम बोनस राशि सरकार द्वारा नियमों और स्वीकृत फॉर्मूले के आधार पर तय की जाएगी।
लेवल-2 और उससे ऊपर के कर्मचारियों के लिए भी मांग….
रेलवे यूनियनों ने सिर्फ लेवल-1 कर्मचारियों के लिए ही बदलाव की मांग नहीं की है। उनका कहना है कि लेवल-2 और उससे ऊपर के कर्मचारियों के लिए भी बोनस की सीमा उनकी वेतन संरचना के अनुपात में बढ़ाई जानी चाहिए। यूनियनों का कहना है कि कर्मचारियों की सैलरी और महंगाई में समय के साथ बदलाव हुआ है, इसलिए बोनस कैलकुलेशन की सीमा को भी मौजूदा वेतन व्यवस्था के अनुरूप किया जाना चाहिए।
NC-JCM ने भी उठाई है सीमा बढ़ाने की मांग…..
यह मांग ऐसे समय में आई है जब केंद्रीय कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) भी PLB की वेतन सीमा बढ़ाने की मांग कर चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक, NC-JCM ने सरकार से बोनस की मौजूदा 7,000 रुपये की वेतन सीमा को बढ़ाकर 21,000 रुपये करने का अनुरोध किया है। इससे साफ है कि बोनस की मौजूदा सीमा को लेकर कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों के बीच लंबे समय से असंतोष है।
अब सरकार के फैसले का इंतजार…..
त्योहारों से पहले बोनस कर्मचारियों के लिए बड़ी आर्थिक मदद साबित होता है। ऐसे में रेलवे यूनियनों की यह मांग अगर स्वीकार होती है तो हजारों कर्मचारियों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है। फिलहाल गेंद सरकार के पाले में है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार रेलवे कर्मचारियों की 78 दिनों के बोनस की गणना 18,000 रुपये बेसिक और DA के आधार पर करने की मांग पर क्या फैसला लेती है। अगर सरकार बोनस की सीमा में बदलाव करती है, तो त्योहारों से पहले रेलवे कर्मचारियों को मिलने वाली रकम में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हो सकती है।
