E20 पेट्रोल से वाहन मालिकों की बढ़ी चिंता! पेट्रोल टैंक में काली फंगस जमने, माइलेज घटने और इंजन में जंग लगने की शिकायतें सामने आ रही हैं। जानिए क्या है वजह और कैसे करें बचाव।

नई दिल्ली। देश में पेट्रोल पर निर्भरता कम करने और प्रदूषण घटाने के उद्देश्य से एथेनॉल मिश्रित ईंधन (E20) को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। हालांकि, इसके साथ कुछ वाहन मालिकों के सामने नई चुनौतियां भी उभर रही हैं। कई लोगों ने शिकायत की है कि उनके वाहनों के पेट्रोल टैंक में काली फंगस जैसी परत जम रही है, जिससे माइलेज कम हो रहा है और सर्विसिंग का खर्च भी बढ़ गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार एथेनॉल में नमी को आकर्षित करने की क्षमता होती है। यदि वाहन लंबे समय तक खड़ा रहता है या टैंक में ईंधन लंबे समय तक जमा रहता है, तो उसमें पानी की मात्रा बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में टैंक के भीतर सूक्ष्म जीवाणु और फंगस पनपने लगते हैं, जो काले रंग की परत या स्लज का रूप ले सकते हैं।
कैसे बनती है समस्या?
एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल वातावरण से नमी को आसानी से अवशोषित कर लेता है। जब टैंक में पानी और ईंधन की परतें अलग होने लगती हैं, तब बैक्टीरिया और फंगस के बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो जाता है। समय के साथ यह गंदगी फ्यूल लाइन, फिल्टर और इंजेक्टर तक पहुंच सकती है।
क्या हैं इसके नुकसान?
- वाहन का माइलेज कम हो सकता है।
- इंजन की परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है।
- फ्यूल फिल्टर जल्दी चोक हो सकते हैं।
- इंजेक्टर और फ्यूल पंप पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
- टैंक और धातु के हिस्सों में जंग लगने का खतरा बढ़ जाता है।
- बार-बार सर्विसिंग और पार्ट्स बदलने की जरूरत पड़ सकती है।
किन वाहनों में ज्यादा खतरा?
विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने वाहन, कम इस्तेमाल होने वाली गाड़ियां और लंबे समय तक पार्क रहने वाले वाहन इस समस्या से अधिक प्रभावित हो सकते हैं। वहीं नए मॉडल के कई वाहन E20 ईंधन के अनुरूप डिजाइन किए जा रहे हैं, जिससे जोखिम कुछ हद तक कम हो सकता है।
बचाव के उपाय
- वाहन को लंबे समय तक बिना चलाए न छोड़ें।
- विश्वसनीय पेट्रोल पंप से ही ईंधन भरवाएं।
- समय-समय पर फ्यूल फिल्टर की जांच कराएं।
- टैंक को पूरी तरह खाली होने से बचाएं।
- वाहन निर्माता द्वारा सुझाए गए रखरखाव नियमों का पालन करें।
- यदि इंजन की परफॉर्मेंस में अचानक गिरावट दिखे तो तुरंत सर्विस सेंटर से जांच कराएं।
सरकार का क्या है उद्देश्य?
भारत सरकार एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा देकर कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना चाहती है। इससे किसानों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है क्योंकि एथेनॉल का उत्पादन गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों से किया जाता है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि ईंधन की गुणवत्ता, वाहन तकनीक और नियमित रखरखाव पर विशेष ध्यान देना जरूरी होगा ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, लेकिन इसके उपयोग के दौरान वाहन मालिकों को रखरखाव के प्रति अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। समय पर सर्विसिंग और सही ईंधन प्रबंधन से फंगस, जंग और माइलेज से जुड़ी समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
