🍷 पुणे में शराबबंदी पर HC की सख्ती! गणेशोत्सव के दौरान 10 दिन की पाबंदी पर हाई कोर्ट ने पूछा- सिर्फ पुणे में ही ऐसा क्यों? जानिए कोर्ट ने प्रशासन से क्या कहा।

महाराष्ट्र के पुणे में गणेशोत्सव के दौरान शराब की बिक्री पर 10 दिनों की रोक लगाने के प्रशासन के फैसले पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने सवाल किया कि आखिर पूरे महाराष्ट्र में से सिर्फ पुणे जिले में ही शराबबंदी क्यों लागू की गई है…? महाराष्ट्र में 14 सितंबर से गणेशोत्सव की शुरुआत होने जा रही है। त्योहार के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुणे प्रशासन ने शराब की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने का आदेश जारी किया था। इस आदेश को लेकर होटल और शराब ठेकेदारों के संगठनों ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया।
हाई कोर्ट ने प्रशासन से पूछा- सिर्फ पुणे ही क्यों….?
शुक्रवार, 11 सितंबर को मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एम. सी. त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने पुणे प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि अगर गणेशोत्सव के दौरान शराब की बिक्री पर रोक कानून-व्यवस्था के लिए जरूरी है, तो यह प्रतिबंध केवल पुणे जिले में ही क्यों लगाया गया? कोर्ट ने यह भी कहा कि मुंबई और महाराष्ट्र के दूसरे हिस्सों में ऐसी रोक नहीं लगाई गई है। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि एक जिले में इस तरह का आदेश जारी करना पुणे और वहां के लोगों को गलत तरीके से निशाना बनाने जैसा है।
“10 दिनों तक शराब की बिक्री पर लगाई गई थी रोक”…..
पुणे जिलाधिकारी की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, गणेश उत्सव के दौरान करीब 10 दिनों तक शराब की बिक्री पर रोक लगाई गई थी। इसी आदेश को होटल मालिकों और शराब कारोबारियों के संगठनों ने अदालत में चुनौती दी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इस तरह की लंबी पाबंदी से लाइसेंसधारक कारोबारियों को आर्थिक नुकसान होगा। वहीं प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी तरह की अव्यवस्था को रोकने की जरूरत का हवाला दिया गया।
‘हर शराब पीने वाला हंगामा नहीं करता’…..
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ शराब की बिक्री रोक देने को कानून-व्यवस्था बनाए रखने का एकमात्र तरीका नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि यह मान लेना उचित नहीं है कि शराब पीने वाला हर व्यक्ति सड़क पर हंगामा करेगा या कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा करेगा। कोर्ट ने प्रशासन को अपने फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी टिप्पणी की कि अगर शराब पीने वाले लोगों को 10 दिनों तक शराब नहीं मिलेगी तो वे अस्पतालों में पहुंच सकते हैं।
आदेश वापस लेने पर देना होगा जवाब…..
हाई कोर्ट की पीठ ने पुणे जिलाधिकारी की ओर से पेश वकील से कहा कि वह दिन में बाद में अदालत को बताए कि प्रशासन शराबबंदी का आदेश वापस लेगा या नहीं। कोर्ट ने संकेत दिया कि अगर आदेश वापस नहीं लिया गया तो वह इस मामले में उचित न्यायिक आदेश पारित कर सकती है। फिलहाल अदालत की सख्ती के बाद पुणे में गणेशोत्सव के दौरान शराब बिक्री पर लगी 10 दिन की पाबंदी को लेकर प्रशासन के अगले कदम पर नजर बनी हुई है।
निष्कर्ष…..
गणेशोत्सव जैसे बड़े त्योहार के दौरान सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन शराबबंदी जैसे व्यापक फैसले को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने समानता और तर्कसंगतता पर सवाल उठाए हैं। अब देखना होगा कि पुणे प्रशासन अदालत की टिप्पणी के बाद अपने आदेश में क्या बदलाव करता है।
