हीरो नहीं, फिर भी बना ली खास पहचान! 🎬 दीपक तिजोरी ने 'आशिकी' और 'जो जीता वही सिकंदर' जैसी फिल्मों में हीरो के दोस्त बनकर खूब वाहवाही लूटी। दिलचस्प बात ये है कि वह सिर्फ एक फिल्म में लीड एक्टर बने थे और कॉलेज में आमिर खान के सीनियर भी थे।

बॉलीवुड में कई ऐसे कलाकार रहे हैं, जिन्होंने मुख्य अभिनेता के बजाय सपोर्टिंग किरदारों से दर्शकों के दिल में अपनी जगह बनाई। इन्हीं में से एक नाम दीपक तिजोरी का है। 80 और 90 के दशक में उन्होंने कई चर्चित फिल्मों में काम किया और खास तौर पर हीरो के दोस्त के किरदारों के लिए पहचाने गए। बतौर लीड एक्टर उनका सफर ज्यादा लंबा नहीं चला। 28 अगस्त 1961 को मुंबई में जन्मे दीपक तिजोरी आज अपना 65वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनके जन्मदिन के मौके पर आइए जानते हैं उनके फिल्मी सफर और जिंदगी से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें।
नौकरी से एक्टिंग तक का सफर….
फिल्मों में आने से पहले दीपक तिजोरी ने नौकरी भी की थी। उन्होंने एक समय होटल मैनेजर के तौर पर काम किया। इसके साथ ही वह थिएटर से भी जुड़े रहे और अभिनय की बारीकियां सीखते रहे। फिल्म इंडस्ट्री में जगह बनाने के लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। कई फिल्ममेकर्स के चक्कर लगाने के बाद आखिरकार उन्हें एक ऐसी फिल्म में काम करने का मौका मिला, जिसने उनके करियर की शुरुआत ही शानदार तरीके से कर दी।
‘आशिकी’ से मिला बड़ा ब्रेक….
साल 1990 में रिलीज हुई ‘आशिकी’ दीपक तिजोरी के करियर के लिए बड़ा मोड़ साबित हुई। महेश भट्ट के निर्देशन में बनी इस फिल्म में राहुल रॉय और अनु अग्रवाल मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म में दीपक ने राहुल रॉय के दोस्त बल्लू का किरदार निभाया था। फिल्म के साथ-साथ इसके गाने भी जबरदस्त हिट हुए और राहुल रॉय व अनु अग्रवाल रातोंरात लोकप्रिय हो गए। दीपक तिजोरी को भी इस सपोर्टिंग रोल से काफी पहचान मिली।
आमिर खान के कॉलेज सीनियर थे दीपक….

दीपक तिजोरी और आमिर खान की दोस्ती की कहानी भी काफी दिलचस्प है। दोनों ने मुंबई के नरसी कॉलेज से पढ़ाई की थी। दीपक तिजोरी आमिर खान से सीनियर थे। बाद में दोनों ने फिल्मों में भी साथ काम किया। साल 1992 में आई फिल्म ‘जो जीता वही सिकंदर’ में दीपक ने आमिर खान के दोस्त का किरदार निभाया। खास बात यह है कि रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फिल्म में दीपक को कास्ट कराने के लिए आमिर खान ने उनका नाम मेकर्स को सुझाया था।
हीरो के दोस्त के किरदार में मिली लोकप्रियता….

दीपक तिजोरी ने अपने करियर में कई फिल्मों में लीड एक्टर्स के दोस्त की भूमिका निभाई। ‘आशिकी’ के बाद उन्होंने ‘सड़क’ में गोटिया और ‘खिलाड़ी’ में बोनी का किरदार निभाया। इन भूमिकाओं में वह भले ही मुख्य अभिनेता नहीं थे, लेकिन उनकी स्क्रीन प्रेजेंस दर्शकों को पसंद आई। यही वजह रही कि 90 के दशक में वह बॉलीवुड के चर्चित सपोर्टिंग एक्टर्स में गिने जाने लगे।
सिर्फ एक फिल्म में निभाया लीड रोल….
दिलचस्प बात यह है कि इतने लंबे फिल्मी करियर के बावजूद दीपक तिजोरी सिर्फ एक फिल्म में मुख्य अभिनेता के तौर पर नजर आए। साल 1993 में रिलीज हुई ‘पहला नशा’ में उन्होंने लीड रोल निभाया था। फिल्म में पूजा भट्ट और रवीना टंडन भी अहम भूमिकाओं में थीं। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर वैसी सफलता हासिल नहीं कर सकी, जिसकी उम्मीद की जा रही थी। इसके बाद दीपक तिजोरी का करियर दोबारा सपोर्टिंग भूमिकाओं की ओर चला गया।
एक्टिंग के साथ निर्देशन में भी आजमाया हाथ….
अभिनय के बाद दीपक तिजोरी ने निर्देशन के क्षेत्र में भी कदम रखा। उन्होंने ‘फरेब’, ‘टॉम, डिक एंड हैरी’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। बतौर निर्देशक भी उन्हें उस स्तर की सफलता नहीं मिली, जिसकी उम्मीद थी। इसके बावजूद उन्होंने लगातार अलग-अलग भूमिकाओं और प्रोजेक्ट्स के जरिए इंडस्ट्री में अपनी मौजूदगी बनाए रखी।
अब भी फिल्मों से जुड़े हैं दीपक तिजोरी….
दीपक तिजोरी ने बाद के वर्षों में एक्टिंग से कुछ दूरी जरूर बनाई, लेकिन फिल्मी दुनिया को पूरी तरह अलविदा नहीं कहा। साल 2025 में वह ‘इकोज ऑफ अस’ नाम की शॉर्ट फिल्म में नजर आए थे। अब वह गुजराती फिल्म ‘गेट सेट गो’ को लेकर भी चर्चा में हैं। यानी दशकों के करियर के बाद भी दीपक तिजोरी का फिल्मों से रिश्ता कायम है।
दीपक तिजोरी की कहानी क्यों खास है….?

दीपक तिजोरी उन कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने लीड हीरो बने बिना भी बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई। ‘आशिकी’ और ‘जो जीता वही सिकंदर’ जैसी फिल्मों में उनके दोस्त के किरदार आज भी याद किए जाते हैं। उनका सफर यह दिखाता है कि किसी फिल्म में मुख्य चेहरा न होने के बावजूद एक कलाकार अपने अभिनय से दर्शकों के बीच लंबे समय तक पहचान बना सकता है।
