दुनिया का 17% तेल, फिर भी बर्बाद हुआ वेनेजुएला! आखिर इतनी बड़ी तेल संपदा के बावजूद देश आर्थिक संकट में कैसे फंसा? जानें पूरी कहानी।

वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा साबित कच्चा तेल भंडार है, लेकिन इसके बावजूद देश लंबे समय तक आर्थिक संकट, महंगाई और बेरोजगारी से जूझता रहा. आखिर तेल की इतनी बड़ी दौलत देश के काम क्यों नहीं आई?
दुनिया में कई ऐसे देश हैं जिनके पास प्राकृतिक संसाधनों की भरमार है, लेकिन इसके बावजूद उनकी अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं है. वेनेजुएला इसका सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है. देश के पास दुनिया का सबसे बड़ा साबित कच्चा तेल भंडार है और वैश्विक भंडार में इसकी हिस्सेदारी करीब 17 फीसदी बताई जाती है. इसके बावजूद वेनेजुएला को लंबे समय तक गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा. कभी तेल की कमाई के दम पर मजबूत नजर आने वाली वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था बाद में महंगाई, बेरोजगारी, कर्ज और तेल उत्पादन में गिरावट की वजह से बुरी तरह प्रभावित हुई. अब एक बार फिर वेनेजुएला का तेल वैश्विक राजनीति और अमेरिकी रणनीति के केंद्र में है.
वेनेजुएला के पास इतना तेल कहां है….?
वेनेजुएला का ज्यादातर तेल ओरिनोको ऑयल बेल्ट में मौजूद है. यहां भारी और ज्यादा सल्फर वाला कच्चा तेल पाया जाता है. इस तरह के तेल को निकालने और रिफाइन करने के लिए सामान्य कच्चे तेल की तुलना में ज्यादा तकनीक, निवेश और विशेष रिफाइनिंग क्षमता की जरूरत होती है. इसलिए सिर्फ जमीन के नीचे तेल का विशाल भंडार होना पर्याप्त नहीं है. उसे निकालने के लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और लगातार निवेश भी जरूरी है.
तेल की दौलत बनी अर्थव्यवस्था की कमजोरी….
वेनेजुएला की सबसे बड़ी समस्या यह रही कि उसकी अर्थव्यवस्था तेल पर बहुत ज्यादा निर्भर हो गई. सरकार की कमाई, विदेशी मुद्रा और निर्यात का बड़ा हिस्सा तेल से आता था. जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची थीं, तब सरकार के पास भारी राजस्व आया. लेकिन तेल उद्योग में पर्याप्त निवेश और रखरखाव नहीं होने से उत्पादन क्षमता धीरे-धीरे कमजोर होती गई. सरकारी खर्च और सामाजिक योजनाओं पर बड़े पैमाने पर पैसा खर्च हुआ, लेकिन तेल उद्योग के पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर को उसी स्तर पर मजबूत नहीं किया जा सका.
2002-03 की हड़ताल के बाद बड़ा झटका….
वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है. 2002-03 की बड़ी हड़ताल के बाद कंपनी में बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को हटाया गया. इसके बाद तेल उत्पादन पहले के स्तर पर वापस नहीं आ सका. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक साल 2000 में वेनेजुएला करीब 32 लाख बैरल प्रतिदिन तेल का उत्पादन कर रहा था. आने वाले वर्षों में उत्पादन में लगातार गिरावट देखने को मिली. यानी देश के पास तेल का भंडार तो दुनिया में सबसे बड़ा था, लेकिन उसे जमीन से निकालने की क्षमता लगातार कमजोर होती चली गई.
2014 के बाद तेल की कीमतों में गिरावट….
वेनेजुएला के लिए अगला बड़ा झटका अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से आया. 2014 के बाद तेल की कीमतों में तेज गिरावट आई. चूंकि वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था तेल पर बहुत ज्यादा निर्भर थी, इसलिए सरकार की आय और विदेशी मुद्रा पर इसका सीधा असर पड़ा. तेल की कीमत कम होने के साथ उत्पादन भी गिरता गया. इससे सरकार की कमाई कम हुई और आर्थिक संकट और गहरा हो गया.
कर्ज और महंगाई ने बढ़ाई मुश्किल….
तेल से होने वाली कमाई घटने के बाद सरकार के सामने खर्च चलाने और विदेशी कर्ज का भुगतान करने की चुनौती बढ़ गई. तेल उत्पादन में गिरावट का मतलब था कम निर्यात, कम विदेशी मुद्रा और कम सरकारी राजस्व. इसका असर आम लोगों पर भी पड़ा. देश में महंगाई तेजी से बढ़ी और आर्थिक हालात इतने खराब हुए कि बड़ी संख्या में लोगों को बेहतर अवसरों की तलाश में देश छोड़ना पड़ा. इस तरह वेनेजुएला की कहानी यह दिखाती है कि प्राकृतिक संसाधनों की बड़ी मात्रा अपने आप किसी देश को समृद्ध नहीं बनाती. उसके लिए बेहतर आर्थिक नीतियां, मजबूत संस्थान, निवेश और संसाधनों का सही प्रबंधन भी जरूरी है.
अब अमेरिका की नजर वेनेजुएला के तेल पर क्यों….?
वेनेजुएला का विशाल तेल भंडार एक बार फिर वैश्विक चर्चा में है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से वेनेजुएला के साथ बड़ी ऑयल डील का ऐलान किए जाने की खबरों ने इस मुद्दे को और महत्वपूर्ण बना दिया है. इस समझौते से अमेरिकी कंपनियों की वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में भूमिका बढ़ने की संभावना बताई जा रही है. अमेरिका के लिए यह सिर्फ तेल खरीदने का मामला नहीं है, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक तक ज्यादा पहुंच बनाने का अवसर भी माना जा सकता है. वेनेजुएला के तेल उद्योग को तुरंत पहले जैसी स्थिति में लाना आसान नहीं होगा. लंबे समय से कमजोर पड़े कुओं, पाइपलाइनों, रिफाइनरियों, मशीनरी और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़े निवेश की जरूरत होगी.
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है वेनेजुएला का तेल….?
भारत दुनिया के बड़े कच्चे तेल आयातक देशों में शामिल है. ऐसे में वेनेजुएला में तेल उत्पादन बढ़ने का असर वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है. अगर वेनेजुएला से अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ी मात्रा में अतिरिक्त कच्चा तेल आता है और वैश्विक सप्लाई बढ़ती है, तो इससे कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बन सकता है. ऐसी स्थिति में भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश को फायदा मिल सकता है. इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि वेनेजुएला कितनी तेजी से अपना उत्पादन बढ़ा पाता है और वैश्विक तेल बाजार में उस समय मांग और सप्लाई की स्थिति कैसी रहती है.
वेनेजुएला की कहानी से क्या सीख मिलती है….?
वेनेजुएला की कहानी सिर्फ तेल की नहीं, बल्कि संसाधनों के सही प्रबंधन की कहानी है. किसी देश के पास प्राकृतिक संसाधनों का विशाल भंडार होना उसकी आर्थिक सफलता की गारंटी नहीं है. अगर उत्पादन क्षमता में निवेश न हो, अर्थव्यवस्था एक ही संसाधन पर निर्भर हो जाए और वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव का सामना करने के लिए मजबूत व्यवस्था न हो, तो प्राकृतिक संपदा भी आर्थिक संकट से देश को नहीं बचा सकती. वेनेजुएला के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह अपने विशाल तेल भंडार को दोबारा आर्थिक ताकत में कैसे बदलता है…..
