कसौली केस में मोहन लाल बड़ौली को हाईकोर्ट से राहत! ⚖️ कोर्ट ने पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को सही ठहराया और कहा कि केवल एकतरफा बयानों के आधार पर आरोपी को समन नहीं किया जा सकता।

हिमाचल प्रदेश के कसौली में सामने आए कथित गैंगरेप मामले में हरियाणा बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को सही मानते हुए पीड़िता की ओर से दाखिल पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल शिकायतकर्ता के एकतरफा बयान या हलफनामे के आधार पर किसी आरोपी को समन जारी नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब मामले में मौजूद मुख्य गवाह आरोपों की पुष्टि नहीं कर रहा हो।
क्या है पूरा मामला …..?
यह मामला कसौली के एक होटल से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 3 जुलाई 2023 को मोहन लाल बड़ौली और रॉकी मित्तल ने उसे और उसकी सहेली को कथित तौर पर नशीला पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म किया। शिकायत में घटना का वीडियो बनाए जाने का आरोप भी लगाया गया था। इस मामले में पुलिस के पास शिकायत 13 दिसंबर 2024 को दर्ज कराई गई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
जांच में नहीं मिले पर्याप्त सबूत…..
पुलिस जांच के दौरान आरोपों की पुष्टि करने वाले पर्याप्त ठोस साक्ष्य नहीं मिले। इसके बाद कसौली की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने 8 जनवरी 2026 को पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली। इस फैसले को चुनौती देते हुए शिकायतकर्ता ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने अब इस याचिका को खारिज कर दिया है।
देरी और मेडिकल जांच का भी कोर्ट ने किया जिक्र……
अदालत ने मामले में शिकायत दर्ज होने में हुई देरी का भी उल्लेख किया। कोर्ट के मुताबिक कथित घटना और FIR दर्ज होने के बीच करीब 18 महीने का अंतर था और रिकॉर्ड में इस देरी का संतोषजनक कारण सामने नहीं आया। अदालत ने यह भी नोट किया कि शिकायतकर्ता ने मेडिकल जांच कराने से इनकार किया था। इसके चलते मामले में वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं हो सके।
होटल कर्मचारियों के बयान भी जांच का हिस्सा……
हाईकोर्ट ने उपलब्ध रिकॉर्ड पर गौर करते हुए कहा कि होटल के कर्मचारियों और उस समय वहां मौजूद अन्य लोगों ने किसी तरह की चीख-पुकार या असामान्य गतिविधि की पुष्टि नहीं की। अदालत ने इन परिस्थितियों और पुलिस की जांच रिपोर्ट को देखते हुए क्लोजर रिपोर्ट को उचित माना।
कोर्ट ने क्या कहा ……?
हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों में पीड़िता का बयान महत्वपूर्ण होता है, लेकिन किसी आरोपी को मुकदमे का सामना करने के लिए सिर्फ आरोपों के आधार पर समन नहीं किया जा सकता, जब उपलब्ध रिकॉर्ड में आरोपों की पुष्टि करने वाले विश्वसनीय साक्ष्य मौजूद न हों। इस फैसले के साथ फिलहाल इस मामले में मोहन लाल बड़ौली को हाईकोर्ट से राहत मिली है। यह फैसला उपलब्ध जांच रिकॉर्ड और मामले में पेश सामग्री के आधार पर दिया गया है।
Disclaimer : यह खबर अदालत के फैसले और उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के आधार पर तैयार की गई है। इसमें दर्ज आरोपों का उल्लेख केवल मामले के संदर्भ में किया गया है। किसी व्यक्ति की कानूनी स्थिति अदालत के अंतिम आदेशों और लागू कानूनी प्रक्रिया के अधीन होती है।
