उल्टी गंगा! 🐟🇮🇳🇧🇩 कभी बांग्लादेश से आती थी हिलसा, अब भारत भेज रहा है मछली! 2 महीने में करीब 500 टन का निर्यात।

भारत और बांग्लादेश के बीच हिलसा मछली का व्यापार लंबे समय से चर्चा में रहा है। एक समय था जब भारत, खासकर पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में, बांग्लादेश की पद्मा नदी की हिलसा का बेसब्री से इंतजार किया जाता था। लेकिन अब इस व्यापार की तस्वीर बदलती नजर आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने पिछले दो महीनों में करीब 500 टन हिलसा मछली बांग्लादेश को निर्यात की है। आने वाले हफ्तों में 150 से 200 टन अतिरिक्त हिलसा भेजे जाने की भी संभावना बताई जा रही है।
कभी बांग्लादेश से आती थी हिलसा…..
हिलसा मछली बांग्लादेश की पहचान और खान-पान का अहम हिस्सा मानी जाती है। भारत में भी खासकर बंगाली समुदाय के बीच इसकी काफी मांग रही है। बांग्लादेश की ओर से दुर्गा पूजा जैसे मौकों पर भारत को हिलसा भेजे जाने को दोनों देशों के रिश्तों में एक खास तरह की ‘हिलसा डिप्लोमेसी’ के रूप में भी देखा जाता रहा है। जब बांग्लादेश से हिलसा की खेप भारत पहुंचती थी, तो पश्चिम बंगाल के बाजारों में इसे खरीदने के लिए लोगों की भीड़ देखने को मिलती थी। लेकिन इस बार कहानी कुछ अलग है।
अब भारत से बांग्लादेश जा रही हिलसा…..
मछली कारोबारियों के मुताबिक, पिछले दो महीनों में कोलकाता से बांग्लादेश को करीब 500 टन हिलसा भेजी गई है। इसके अलावा आने वाले कुछ हफ्तों में 150 से 200 टन और मछली निर्यात किए जाने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार, हिलसा की कुछ बड़ी खेप गुजरात के भरूच बंदरगाह से बांग्लादेश के लिए भेजी गई हैं। वहीं कुछ सप्लाई पश्चिम बंगाल के हावड़ा स्थित थोक मछली बाजार के जरिए भी हुई है।
बांग्लादेश में क्यों पड़ गई हिलसा की कमी….?
इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह बांग्लादेश में हिलसा के उत्पादन में आई कमी बताई जा रही है। घरेलू मांग को पूरा करने के लिए वहां के व्यापारियों को दूसरे देशों से हिलसा मंगानी पड़ रही है। हावड़ा थोक मछली आयातक संघ के सचिव सैयद अनवर मकसूद के मुताबिक, इस साल बांग्लादेश में हिलसा की कमी है। यही वजह है कि वहां के कारोबारी भारत से हिलसा खरीद रहे हैं।
गुजरात की हिलसा की भी मांग….
कारोबारियों के मुताबिक, गुजरात से मिलने वाली हिलसा में काफी मात्रा में अंडे होते हैं और बांग्लादेश में इनकी भी अच्छी मांग है। मछली के अंडों को अलग करके प्रोसेसिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेशी कारोबारी भारत से आने वाली कुछ हिलसा को प्रोसेस करके विदेशी बाजारों में भी भेज रहे हैं। वहीं कुछ मछलियों को घरेलू बाजार के लिए सुखाकर ‘साल्टेड हिलसा’ के रूप में बेचा जा रहा है।
हिलसा व्यापार की बदली तस्वीर…..
भारत और बांग्लादेश के बीच हिलसा का यह बदला हुआ व्यापार दोनों देशों के मछली बाजार में आए बदलाव को दिखाता है। जिस मछली के लिए कभी भारत बांग्लादेश की ओर देखता था, अब उसी मछली की सप्लाई भारत से बांग्लादेश हो रही है। यह स्थिति बांग्लादेश में इस साल हिलसा के उत्पादन और उपलब्धता से जुड़ी बताई जा रही है। आने वाले महीनों में उत्पादन और मांग की स्थिति बदलने के साथ दोनों देशों के बीच हिलसा व्यापार की दिशा भी बदल सकती है।
