सावन में बालकनी में लगाएं ये 5 औषधीय पौधे, हरियाली के साथ मिलेंगे कई पारंपरिक स्वास्थ्य लाभ

सावन और बारिश का मौसम घर में नए पौधे लगाने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान नमी और अनुकूल मौसम के कारण पौधों की वृद्धि तेज होती है और उनकी देखभाल भी अपेक्षाकृत आसान रहती है। अगर आप अपनी बालकनी या छत को हरियाली से सजाने के साथ ऐसे पौधे लगाना चाहते हैं, जिनका उपयोग पारंपरिक रूप से रोजमर्रा की छोटी-मोटी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों में भी किया जाता रहा है, तो कुछ औषधीय पौधे बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये पौधे किसी बीमारी का इलाज नहीं हैं और स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है।
1. तुलसी
तुलसी को भारतीय घरों में विशेष महत्व दिया जाता है। इसे 10 से 12 इंच के गमले में आसानी से लगाया जा सकता है। सावन में इसकी बढ़वार अच्छी होती है और लगभग 40 से 50 दिनों में इसकी पत्तियां उपयोग के लिए तैयार हो जाती हैं। तुलसी की पत्तियों का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से चाय, काढ़ा और घरेलू नुस्खों में किया जाता है। इसमें पाए जाने वाले प्राकृतिक तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को समर्थन देने से जुड़े माने जाते हैं।
2. पुदीना
अगर आप जल्दी तैयार होने वाला पौधा लगाना चाहते हैं तो पुदीना एक अच्छा विकल्प है। इसकी एक छोटी-सी टहनी से नया पौधा तैयार किया जा सकता है और बारिश के मौसम में यह तेजी से फैलता है। लगभग 30 से 35 दिनों में इसकी पहली कटाई की जा सकती है। पुदीने का उपयोग पारंपरिक रूप से चटनी, पेय पदार्थ और पाचन संबंधी घरेलू नुस्खों में किया जाता है।
3. अजवाइन का पौधा
अजवाइन का पौधा अपनी सुगंधित पत्तियों के लिए जाना जाता है। इसकी कटिंग मानसून में आसानी से लग जाती है और करीब 20 से 25 दिनों में अच्छी तरह विकसित होने लगती है। पारंपरिक घरेलू उपयोग में इसकी पत्तियों का इस्तेमाल गैस और पेट फूलने जैसी समस्याओं में किया जाता रहा है।
4. अश्वगंधा
अश्वगंधा आयुर्वेद में लंबे समय से उपयोग किया जाने वाला पौधा है। इसके बीज जुलाई में बोए जाते हैं और इसकी जड़ों को तैयार होने में लगभग 150 से 180 दिन लगते हैं। पारंपरिक चिकित्सा में इसका उपयोग तनाव, थकान और सामान्य स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए किया जाता रहा है। हालांकि, इसका सेवन विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही करना चाहिए।
5. पत्थरचट्टा
पत्थरचट्टा ऐसा पौधा है जिसे उगाना बेहद आसान है। इसकी केवल एक पत्ती मिट्टी पर रखने से नया पौधा विकसित हो सकता है। लगभग 60 से 70 दिनों में यह अच्छी तरह बढ़ जाता है। पारंपरिक चिकित्सा में इसका उपयोग किडनी स्टोन जैसी समस्याओं से जुड़े घरेलू नुस्खों में किया जाता रहा है, लेकिन इसके औषधीय उपयोग के लिए चिकित्सकीय सलाह आवश्यक है।
गमला तैयार करने का सही तरीका
विशेषज्ञों के अनुसार, इन पौधों के लिए 12 से 14 इंच का गमला उपयुक्त रहता है। गमले में अच्छा ड्रेनेज होल होना चाहिए ताकि अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके। सबसे पहले ड्रेनेज होल को कंकड़ या टूटे हुए मिट्टी के बर्तन के टुकड़े से ढकें। इसके बाद 50 प्रतिशत बगीचे की मिट्टी, 30 प्रतिशत गोबर की सड़ी हुई खाद या वर्मी कम्पोस्ट और 20 प्रतिशत रेत मिलाकर मिश्रण तैयार करें। रेत मिलाने से बारिश के मौसम में पानी का जमाव नहीं होता और पौधों की जड़ें सड़ने से बची रहती हैं।
पौधों की देखभाल के आसान टिप्स
पुदीना और अजवाइन तेजी से फैलने वाले पौधे हैं, इसलिए इन्हें चौड़े मुंह वाले गमले में लगाना बेहतर रहता है। वहीं अश्वगंधा की जड़ें गहराई तक जाती हैं, इसलिए इसके लिए गहरा गमला चुनें। सभी पौधों को ऐसी जगह रखें जहां रोजाना कम से कम 4 से 5 घंटे की धूप मिल सके। बारिश के मौसम में तभी पानी दें जब गमले की ऊपरी मिट्टी सूखी महसूस हो। अधिक पानी या जलभराव पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है।
नोट: इस लेख में दी गई जानकारी बागवानी संबंधी जानकारी पर आधारित है। किसी भी बीमारी के इलाज या औषधीय उपयोग के लिए डॉक्टर या योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
