India LNG Crisis: कतर से LNG सप्लाई में अनिश्चितता और Strait of Hormuz संकट ने बढ़ाई भारत की Energy Security की चिंता, जानें क्यों जरूरी है Strategic Reserve बढ़ाना।

भारत की एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर एक नई चिंता सामने आ रही है। कच्चे तेल के लिए भारी आयात निर्भरता के बीच अब LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) की सप्लाई भी दबाव में है। कतर से LNG की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती बढ़ा दी है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। ऐसे में किसी बड़े सप्लायर या महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में लंबे समय तक व्यवधान आने पर घरेलू बाजार पर इसका असर पड़ सकता है।
कतर से LNG सप्लाई में क्यों आई परेशानी….?
भारत LNG का बड़ा आयातक है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में भारत ने करीब 26 मिलियन टन LNG आयात की थी। इसमें कतर और UAE की हिस्सेदारी लगभग 59 फीसदी रही। मार्च 2026 में कतर के रास लाफन LNG परिसर को नुकसान पहुंचने के बाद सप्लाई प्रभावित हुई। इसके बाद कतर एनर्जी ने फोर्स मेज्योर लागू किया, जिसके कारण अनुबंधित सप्लाई में अनिश्चितता बढ़ गई। भारत की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि सितंबर 2026 के लिए कतर की तरफ से सप्लाई को लेकर स्पष्ट योजना सामने नहीं आई है।
भारत को कितनी LNG सप्लाई प्रभावित हुई….?
रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 56 LNG कार्गो प्रभावित हो चुके हैं। पेट्रोनेट LNG के कुछ टैंकर भी कतर से कार्गो आने की प्रतीक्षा में खड़े रहे हैं। लंबे समय तक सप्लाई बाधित रहने का सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ सकता है, जो सस्ती लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्टेड LNG पर निर्भर हैं। उन्हें जरूरत पूरी करने के लिए स्पॉट मार्केट से महंगी LNG खरीदनी पड़ सकती है।
LNG संकट का भारत पर क्या असर….?
1. इंडस्ट्री को कम गैस मिल सकती है :-
संकट की शुरुआत के बाद भारत में इंडस्ट्री और कुछ सिटी गैस कंपनियों को गैस सप्लाई में कटौती का सामना करना पड़ा। घरेलू PNG और CNG जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की सप्लाई को सुरक्षित रखने की कोशिश की गई, लेकिन बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं पर दबाव बढ़ा।
2. महंगी हो सकती है LNG :-
जब सस्ती कॉन्ट्रैक्टेड LNG उपलब्ध नहीं होती, तो आयातकों को स्पॉट मार्केट से गैस खरीदनी पड़ती है। स्पॉट LNG की कीमत ज्यादा होने से कंपनियों की लागत बढ़ती है और इसका असर उनके मार्जिन पर पड़ सकता है।
3. CNG सेक्टर पर भी असर :-
महंगी गैस का असर सिटी गैस कंपनियों पर भी पड़ सकता है। गैस की लागत बढ़ने पर कंपनियों के मार्जिन दबाव में आते हैं और भविष्य में कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
Strait of Hormuz क्यों है सबसे बड़ा जोखिम….?
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए Strait of Hormuz बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। पश्चिम एशिया से आने वाली बड़ी मात्रा में तेल और LNG इसी रास्ते से गुजरती है। अगर किसी वजह से इस समुद्री मार्ग से आवाजाही लंबे समय तक बाधित होती है, तो भारत समेत कई आयातक देशों के लिए ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसलिए पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव भारत के लिए सिर्फ विदेश नीति का मुद्दा नहीं, बल्कि सीधा ऊर्जा सुरक्षा का सवाल भी है।
भारत ने LNG के लिए क्या कदम उठाए….?
कतर पर निर्भरता कम करने के लिए भारत ने LNG के स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश तेज की है। अब भारत पहले की तुलना में ज्यादा देशों से LNG खरीद रहा है। अमेरिका, ओमान, नाइजीरिया, अंगोला, ब्राजील और मोजाम्बिक जैसे देशों से आयात बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। हाल के महीनों में अमेरिका भारत के लिए एक महत्वपूर्ण LNG सप्लायर बनकर उभरा है। विशेषज्ञों की चिंता यह भी है कि किसी एक नए देश पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य में एक अलग तरह का जोखिम पैदा कर सकती है। इसलिए सप्लाई सोर्स को ज्यादा से ज्यादा देशों में बांटना जरूरी है।
ऑस्ट्रेलिया से भी LNG मिलने की उम्मीद….
भारत LNG की आपूर्ति को मजबूत करने के लिए ऑस्ट्रेलिया की ओर भी देख रहा है। पेट्रोनेट LNG को ऑस्ट्रेलिया के Gorgon प्रोजेक्ट से अतिरिक्त LNG मिलने की उम्मीद है। इस तरह के दीर्घकालिक समझौते भारत को स्पॉट मार्केट की अस्थिर कीमतों से कुछ हद तक बचाने में मदद कर सकते हैं।
कच्चे तेल के मामले में भी भारत की निर्भरता ज्यादा….
LNG के साथ-साथ कच्चे तेल के मामले में भी भारत की स्थिति चुनौतीपूर्ण है। देश अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। आपात स्थिति में इस्तेमाल के लिए भारत के पास Strategic Petroleum Reserve यानी SPR है। 23 मार्च 2026 को संसद में बताए गए आंकड़ों के मुताबिक, ISPRL के पास करीब 3.372 MMT कच्चा तेल मौजूद था, जो उसकी कुल क्षमता का लगभग 64 फीसदी था। भारत के SPR की मौजूदा क्षमता करीब 5.33 MMT है, जो लगभग 9.5 दिनों की जरूरत पूरी करने के बराबर बताई गई है।
भारत का 90 दिन का रिजर्व लक्ष्य कितना दूर….?
International Energy Agency यानी IEA के मानक के मुताबिक सदस्य देशों को कम से कम 90 दिनों के नेट ऑयल इंपोर्ट के बराबर आपातकालीन तेल भंडार रखना चाहिए। भारत की कुल स्टोरेज क्षमता में सरकारी SPR के अलावा तेल कंपनियों के स्टॉक भी शामिल हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कुल क्षमता करीब 74 दिनों की है, जबकि वास्तविक स्टॉक इससे कम बताया गया है। यानी भारत को 90 दिन के मानक तक पहुंचने के लिए अभी काफी काम करना होगा।
SPR के दूसरे चरण में क्या है योजना….?
भारत सरकार ने Strategic Petroleum Reserve के दूसरे चरण में अतिरिक्त भंडारण क्षमता विकसित करने की योजना बनाई है। इसके तहत ओडिशा के चंडीखोल में 4 MMT और कर्नाटक के पादुर में 2.5 MMT अतिरिक्त क्षमता प्रस्तावित है। भूमि अधिग्रहण, लागत और बोली प्रक्रिया जैसी वजहों से परियोजना में देरी हुई है। पादुर में काम आगे बढ़ने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा मध्य प्रदेश के बीना और राजस्थान के बीकानेर में भी नए SPR स्थलों की योजना पर काम किया जा रहा है।
LPG में भी बदली भारत की रणनीति….
LNG और कच्चे तेल के अलावा LPG के मोर्चे पर भी भारत ने अपनी खरीद रणनीति बदली है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, भारत के LPG आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 67 फीसदी हो गई है, जबकि पहले यह लगभग 10 फीसदी थी। यह बदलाव Strait of Hormuz से जुड़े जोखिमों के बीच सप्लाई को दूसरे स्रोतों से सुरक्षित करने की कोशिश का हिस्सा है।
क्या भारत की Energy Security खतरे में है….?
भारत ने LNG और LPG की खरीद को कई देशों में फैलाने और तेल भंडारण क्षमता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं। लेकिन ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं।
- LNG: कतर और UAE पर पहले भारी निर्भरता रही है और LNG के लिए पर्याप्त रणनीतिक स्टोरेज व्यवस्था सीमित है।
- कच्चा तेल: भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा तेल आयात करता है।
- SPR: मौजूदा सरकारी रणनीतिक भंडार क्षमता करीब 9.5 दिनों की जरूरत के बराबर बताई गई है।
- LPG: अमेरिका से आयात की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है, जिससे सप्लाई स्रोतों को लेकर नई निर्भरता का सवाल भी उठता है।
- Strait of Hormuz: पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री मार्ग में किसी भी लंबे व्यवधान का सीधा असर ऊर्जा आयात पर पड़ सकता है।
आगे भारत के लिए क्या जरूरी है….?
भारत के लिए सिर्फ नए देशों से LNG खरीदना ही पर्याप्त नहीं होगा। लंबे समय की ऊर्जा सुरक्षा के लिए रणनीतिक भंडारण क्षमता बढ़ाना, LNG स्टोरेज विकसित करना, आयात स्रोतों में विविधता लाना और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के जोखिम को ध्यान में रखकर वैकल्पिक सप्लाई व्यवस्था तैयार करना जरूरी होगा। कतर की LNG सप्लाई में अनिश्चितता और Strait of Hormuz से जुड़े जोखिम ने एक बार फिर दिखाया है कि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण है।
