'गटर छाप' टिप्पणी पर सियासी बवाल!

हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत की युवाओं पर की गई टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। जेनरेशन Z (Gen Z) प्रदर्शनकारियों को लेकर दिए गए उनके बयान पर अब हिमाचल प्रदेश सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता विक्रमादित्य सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युवाओं को अपना “फ्रेंड्स” बताते हैं, जबकि दूसरी ओर उनकी पार्टी की सांसद उन्हें अपमानजनक शब्दों से संबोधित कर रही हैं।
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में छात्रों और सामाजिक संगठनों के नेतृत्व में एक लंबा विरोध प्रदर्शन हुआ था। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए थे। इसी आंदोलन से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिन पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने प्रदर्शनकारियों की आलोचना की।
कंगना ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए प्रदर्शन की तस्वीरों और वीडियो को “गंदगी और बदसूरती” का उदाहरण बताया। उन्होंने Gen Z प्रदर्शनकारियों पर टिप्पणी करते हुए उन्हें “Generation G” कहा और उनकी भाषा व व्यवहार पर भी सवाल उठाए। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस शुरू हो गई।
विक्रमादित्य सिंह ने साधा निशाना
कंगना रनौत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए हिमाचल प्रदेश के मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि देश के युवा भारत का भविष्य हैं और उनके बारे में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं युवाओं को “फ्रेंड्स” कहकर संबोधित करते हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से उनसे लगातार संवाद करते रहते हैं। ऐसे में बीजेपी को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि युवाओं को लेकर पार्टी की वास्तविक सोच क्या है।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री युवाओं को देश की ताकत मानते हैं, तो फिर उनकी ही पार्टी की सांसद उन्हें अपमानजनक शब्दों से क्यों संबोधित कर रही हैं।
“बिना सिर-पैर के बयान देती हैं”
विक्रमादित्य सिंह ने कंगना रनौत पर तंज कसते हुए कहा कि वह अक्सर ऐसे बयान देती हैं जिनका कोई ठोस आधार नहीं होता। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि वे स्थानीय देवी-देवताओं से प्रार्थना करेंगे कि कंगना रनौत को सद्बुद्धि मिले ताकि वे भविष्य में जिम्मेदारी के साथ बयान दें।
बता दें कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में 36 दिनों तक विरोध प्रदर्शन हुआ. सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिन तक अनशन किया था. यह प्रदर्शन 25 जुलाई को तब खत्म हुआ जब सरकार ने प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें मान लीं. इसी दिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी इस्तीफा दिया था.
