Everest के कुछ मसालों पर FSSAI की कार्रवाई! 🌶️ हींग की लेबलिंग में गड़बड़ी समेत कई खामियां सामने आईं। जानिए किन मसालों पर उठे सवाल।

देश में पैकेटबंद मसालों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने मशहूर मसाला ब्रांड Everest के कुछ उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई की है। जांच के दौरान हींग की लेबलिंग से जुड़ी खामियां सामने आने के साथ कुछ अन्य मसालों में भी खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की बात कही गई है। FSSAI की कार्रवाई के बाद संबंधित कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। वहीं, कुछ अन्य उत्पादों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
Everest की हींग पर क्या मिला….?
जांच के दौरान Everest की हींग को लेकर लेबलिंग और गुणवत्ता से जुड़ी आपत्तियां सामने आई हैं। नियामक के मुताबिक, उत्पाद की ब्रांडिंग और निर्धारित मानकों से संबंधित कुछ कमियां पाई गईं। खाद्य उत्पादों पर सही जानकारी और निर्धारित मानकों के मुताबिक लेबलिंग उपभोक्ताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसी वजह से FSSAI की ओर से इस मामले में संबंधित पक्ष से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
इन मसालों पर भी उठे सवाल….
हींग के अलावा Everest के कुछ अन्य मसाले भी खाद्य सुरक्षा नियमों से जुड़े मामले में जांच के दायरे में आए हैं। इनमें शामिल हैं:-
- Egg Curry Masala
- Chicken Masala
- Garam Masala
इन उत्पादों को लेकर सामने आई कथित कमियों पर नियामक ने कार्रवाई करते हुए संबंधित कंपनी से जवाब मांगा है।
इसके अलावा लालजी गोधू एंड कंपनी को भी कथित नियम उल्लंघन के संबंध में अलग से चेतावनी दी गई है।
क्या सभी Everest मसालों पर लगा है बैन….?
यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कार्रवाई कुछ खास उत्पादों और उनसे जुड़ी गुणवत्ता/लेबलिंग संबंधी कमियों को लेकर है। इसलिए इसे Everest के सभी मसालों पर पूर्ण प्रतिबंध के तौर पर नहीं समझना चाहिए। उपभोक्ताओं को किसी भी खाद्य उत्पाद को खरीदते समय पैकेट पर मौजूद लाइसेंस, लेबल, सामग्री, बैच नंबर और एक्सपायरी डेट जैसी जानकारियां जरूर देखनी चाहिए।
पैकेट वाले खाने पर आ सकता है नया चेतावनी लेबल….
FSSAI की यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब पैकेटबंद खाद्य पदार्थों की पोषण संबंधी जानकारी को लेकर भी नए नियमों पर चर्चा चल रही है। प्रस्तावित फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी व्यवस्था के तहत ज्यादा चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट वाले उत्पादों पर पैकेट के सामने स्पष्ट चेतावनी देने की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ग्राहकों को सामान खरीदते समय उसके पोषण संबंधी जोखिमों की जानकारी आसानी से उपलब्ध कराना है।
खाद्य कंपनियों को नियमों के पालन पर जोर….
फूड लेबलिंग और सुरक्षा से जुड़े नियमों को लेकर खाद्य उद्योग की ओर से भी कुछ चिंताएं सामने आती रही हैं। दूसरी ओर, खाद्य नियामक और अधिकारी कंपनियों से निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने की अपील करते रहे हैं। Everest के कुछ मसालों को लेकर सामने आया यह मामला एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि पैकेटबंद खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और लेबलिंग की नियमित जांच कितनी महत्वपूर्ण है। उपभोक्ताओं के लिए भी जरूरी है कि वे किसी उत्पाद पर कार्रवाई की खबर सामने आने पर पूरी जानकारी की पुष्टि करें और केवल आधिकारिक निर्देशों के आधार पर ही फैसला लें।
नोट : यह खबर उपलब्ध रिपोर्टों और दी गई जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। किसी भी ब्रांड के सभी उत्पादों पर प्रतिबंध होने का दावा केवल आधिकारिक आदेश की पुष्टि के बाद ही किया जाना चाहिए।
