बच्चों को कफ सिरप देने से पहले सावधान!

छोटे बच्चों को सर्दी-जुकाम होने पर कई माता-पिता घर में मौजूद कफ सिरप या कोल्ड मेडिसिन बिना डॉक्टर की सलाह के दे देते हैं. लेकिन बच्चों के लिए दवाओं के इस्तेमाल को लेकर सरकार ने सख्त कदम उठाया है. कुछ खास कॉम्बिनेशन वाली दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर पाबंदी लगाई गई है. ऐसे में माता-पिता के लिए यह समझना जरूरी है कि किन दवाओं से सावधानी बरतनी है और बच्चे को सर्दी-जुकाम होने पर क्या करना चाहिए.
किन दवाओं पर लगी है पाबंदी?
सरकार ने Chlorpheniramine Maleate और Phenylephrine Hydrochloride वाले फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन यानी FDC दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर रोक लगाई है.
इन दोनों दवा घटकों का इस्तेमाल आमतौर पर सर्दी, जुकाम, नाक बहने और नाक बंद होने जैसी समस्याओं के लिए बनाई जाने वाली कुछ दवाओं में किया जाता रहा है. लेकिन छोटे बच्चों में इन दवाओं के इस्तेमाल को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं सामने आई हैं.
विशेषज्ञों की सलाह और संबंधित तकनीकी सिफारिशों के आधार पर सरकार ने इन दवाओं को लेकर सख्ती बढ़ाई है. दवा कंपनियों को पैकेजिंग, लेबल और प्रचार सामग्री पर आवश्यक चेतावनी देने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि इन दवाओं के इस्तेमाल को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाई जा सके.
छोटे बच्चों के लिए क्यों जरूरी है सावधानी?
बच्चों का शरीर बड़ों से अलग तरीके से दवाओं को अवशोषित और प्रोसेस करता है. इसलिए किसी ऐसी दवा की मात्रा जो बड़े व्यक्ति के लिए सामान्य हो सकती है, वह छोटे बच्चे के लिए सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं है.
विशेष रूप से सर्दी-जुकाम के लिए इस्तेमाल होने वाली कई दवाओं में एक से ज्यादा एक्टिव इंग्रीडिएंट हो सकते हैं. अगर माता-पिता बिना डॉक्टर की सलाह के अलग-अलग दवाएं देते हैं, तो एक ही तरह के घटक की मात्रा अनजाने में ज्यादा हो सकती है. इसी वजह से छोटे बच्चों को कोई भी कफ या कोल्ड सिरप देने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी है.
पहले भी बच्चों के कफ सिरप को लेकर जारी हो चुकी है चेतावनी
बच्चों के लिए कफ सिरप के इस्तेमाल को लेकर सरकार पहले भी सावधानी बरतने की सलाह दे चुकी है. अक्टूबर 2025 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप देने से बचने की सलाह दी थी.
यह कदम मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप के इस्तेमाल के बाद बच्चों की मौतों की खबरों के बीच उठाया गया था. उस समय भी छोटे बच्चों को बिना चिकित्सकीय सलाह के कफ सिरप देने से बचने पर जोर दिया गया था. हालांकि, हर खांसी या सर्दी-जुकाम के लिए कफ सिरप की जरूरत नहीं होती. बच्चे की उम्र, लक्षण और बीमारी के कारण के आधार पर डॉक्टर यह तय करते हैं कि दवा की जरूरत है या नहीं.
माता-पिता खुद से दवा देने की गलती न करें
बच्चे को सर्दी-जुकाम या खांसी होने पर घर में पहले से रखी हुई दवा देना आसान लग सकता है, लेकिन यह आदत नुकसानदायक हो सकती है. खासकर अगर दवा किसी दूसरे बच्चे या परिवार के सदस्य के लिए लिखी गई हो.
बच्चे को दवा देने से पहले इन बातों का ध्यान रखें:
- बिना डॉक्टर की सलाह के कफ या कोल्ड सिरप न दें.
- दवा की बोतल पर लिखे एक्टिव इंग्रीडिएंट और उम्र संबंधी चेतावनी जरूर पढ़ें.
- किसी दूसरे व्यक्ति के लिए लिखी गई दवा बच्चे को न दें.
- एक साथ कई सर्दी-जुकाम की दवाएं देने से बचें.
- डॉक्टर द्वारा बताई गई मात्रा और अवधि का ही पालन करें.
- दवा देने के बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ती है तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें.
हर सर्दी-जुकाम में दवा जरूरी नहीं
बच्चों में होने वाली सामान्य सर्दी-जुकाम की कई समस्याएं समय के साथ अपने आप ठीक हो सकती हैं. इसलिए केवल नाक बहने या हल्की खांसी होने पर तुरंत कफ सिरप शुरू करना जरूरी नहीं है.
बच्चे को पर्याप्त आराम देना, उम्र के अनुसार पर्याप्त तरल पदार्थ देना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार देखभाल करना मददगार हो सकता है. छोटे शिशुओं में नाक बंद होने की समस्या ज्यादा परेशानी पैदा कर सकती है, इसलिए ऐसी स्थिति में भी घरेलू उपचार के बजाय डॉक्टर से उचित सलाह लेना बेहतर है.
किन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर बच्चे को सर्दी-जुकाम के साथ सांस लेने में परेशानी, लगातार तेज बुखार, अत्यधिक सुस्ती, पानी या दूध पीने में परेशानी, बार-बार उल्टी, शरीर में पानी की कमी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे सामान्य सर्दी-जुकाम मानकर घर पर इलाज नहीं करना चाहिए. बहुत छोटे बच्चों, खासकर शिशुओं में बीमारी के लक्षण तेजी से गंभीर हो सकते हैं. ऐसे में समय पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है.
दवा खरीदते समय भी रखें ध्यान
माता-पिता को मेडिकल स्टोर से बच्चों के लिए कोई भी सर्दी-जुकाम की दवा खरीदते समय सावधानी बरतनी चाहिए. सिर्फ यह देखकर दवा न खरीदें कि वह पहले कभी इस्तेमाल की जा चुकी है.
दवा का नाम, उसके एक्टिव इंग्रीडिएंट, बच्चे की उम्र के लिए उसकी उपयुक्तता और डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें. अगर दवा को लेकर कोई संदेह है तो फार्मासिस्ट के बजाय डॉक्टर से स्पष्ट जानकारी लेना ज्यादा सुरक्षित है.
बच्चों की सुरक्षा के लिए सरकार का फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?
बच्चों में दवाओं का सुरक्षित इस्तेमाल सार्वजनिक स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है. सरकार द्वारा कुछ खास दवा संयोजनों पर प्रतिबंध लगाने का उद्देश्य ऐसे उत्पादों के इस्तेमाल से होने वाले संभावित जोखिम को कम करना और सुरक्षित विकल्पों को बढ़ावा देना है. माता-पिता के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चे की बीमारी को देखकर खुद से दवा शुरू करने के बजाय उसकी उम्र और लक्षणों के अनुसार डॉक्टर की सलाह ली जाए.
Disclaimer: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है. दवा से संबंधित किसी भी निर्णय के लिए योग्य डॉक्टर या बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह लें. बच्चे की स्थिति गंभीर होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता प्राप्त करें.
