कतर से LNG सप्लाई रुकी तो बढ़ा भारत का गैस खर्च! 🔥 अब महंगी LNG खरीदने की मजबूरी, क्या बढ़ेंगे LPG सिलेंडर के दाम...?

अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पैदा हुए संकट के कारण कतर से एशियाई देशों को मिलने वाली LNG की सप्लाई प्रभावित हुई है। कतर से लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट के तहत अपेक्षाकृत कम कीमत पर गैस खरीदने वाले देशों को अब स्पॉट मार्केट से महंगी LNG खरीदनी पड़ रही है। भारत भी इस बदलाव से प्रभावित देशों में शामिल है। गैस की खरीद लागत बढ़ने का असर आगे चलकर बिजली, उद्योग और घरेलू ईंधन की कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि, LPG सिलेंडर की कीमत में तत्काल बढ़ोतरी होगी, ऐसा निश्चित नहीं है। यह सरकार और तेल कंपनियों के मूल्य निर्धारण पर भी निर्भर करेगा।
कतर की LNG सप्लाई क्यों है इतनी अहम…..?
कतर दुनिया के प्रमुख LNG निर्यातकों में शामिल है। एशिया के कई देश कतर से लंबे समय के समझौतों के तहत गैस खरीदते हैं। इन कॉन्ट्रैक्ट्स की वजह से उन्हें खुले बाजार की तुलना में अपेक्षाकृत स्थिर और कम कीमत पर LNG मिलती रही है। लेकिन मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी मुश्किलों ने इस सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। इसके चलते कुछ देशों को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए स्पॉट मार्केट का सहारा लेना पड़ रहा है।
स्पॉट मार्केट में क्यों महंगी मिल रही है गैस…..?
स्पॉट मार्केट में LNG की कीमत मांग और उपलब्धता के हिसाब से तेजी से बदलती है। जब किसी समय सप्लाई कम और मांग ज्यादा होती है, तो कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। कतर से तय कीमतों पर आने वाली गैस की सप्लाई प्रभावित होने के बाद भारत समेत कई एशियाई देशों के सामने यही चुनौती खड़ी हुई है। उन्हें जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त LNG ऊंची कीमतों पर खरीदनी पड़ रही है।
भारत समेत कई देशों का खर्च बढ़ा…..
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन को छोड़कर भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, थाईलैंड और वियतनाम ने युद्ध शुरू होने के बाद स्पॉट LNG खरीद पर कुल करीब 7.4 अरब डॉलर खर्च किए हैं। तुलना करें तो पिछले साल समान अवधि में इन देशों ने करीब 3.1 अरब डॉलर खर्च किए थे। यानी इस बार LNG खरीद का खर्च काफी बढ़ गया है। अतिरिक्त खर्च का बड़ा हिस्सा महंगी स्पॉट गैस खरीदने की वजह से सामने आया है। भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों के लिए यह बढ़ी हुई ऊर्जा लागत आर्थिक दबाव को बढ़ा सकती है।
महंगी गैस का असर कहां-कहां पड़ सकता है…..?
LNG का इस्तेमाल केवल बिजली उत्पादन के लिए ही नहीं होता। कई उद्योग भी गैस पर निर्भर हैं। अगर लंबे समय तक LNG महंगी बनी रहती है तो बिजली उत्पादन की लागत बढ़ सकती है। इसके अलावा खाद, प्लास्टिक, स्टील और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों की लागत पर भी असर पड़ सकता है। कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ने पर इसका कुछ हिस्सा आगे चलकर उत्पादों की कीमतों में दिखाई दे सकता है। यानी LNG संकट का असर केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसका प्रभाव अर्थव्यवस्था के कई हिस्सों तक पहुंच सकता है।
क्या LPG सिलेंडर के दाम बढ़ेंगे……?
LNG की कीमत बढ़ने से घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत तुरंत बढ़ जाएगी, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। LPG की कीमत कई कारकों पर निर्भर करती है और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए कीमत तय करने में सरकार की नीतियों की भी भूमिका होती है। अगर वैश्विक ऊर्जा संकट लंबे समय तक बना रहता है और गैस की लागत लगातार ऊंची रहती है, तो ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले समय में LPG समेत अन्य ऊर्जा उत्पादों की कीमतों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
देश ढूंढ रहे हैं दूसरे ऊर्जा विकल्प…..
महंगी LNG के बीच एशियाई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर भी ध्यान दे रहे हैं। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, कोयला और परमाणु ऊर्जा जैसे विकल्पों का इस्तेमाल बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। अगर LNG की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रहती हैं, तो कुछ देशों के लिए महंगी गैस की तुलना में दूसरे ईंधनों का इस्तेमाल आर्थिक रूप से ज्यादा आकर्षक हो सकता है।
आगे क्या होगा…..?
मिडिल ईस्ट में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति आने वाले दिनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहने वाली है। यदि LNG की सप्लाई सामान्य होती है तो स्पॉट मार्केट पर दबाव कम हो सकता है। लेकिन संकट लंबा खिंचने पर एशियाई देशों की ऊर्जा लागत और बढ़ सकती है। भारत के लिए चुनौती यह होगी कि ऊर्जा जरूरतों को पूरा करते हुए महंगी आयातित गैस के असर को कैसे नियंत्रित किया जाए। फिलहाल घरेलू LPG उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि वैश्विक गैस संकट का असर आखिर उनके सिलेंडर की कीमत तक कितना पहुंचता है।
