MPSC छात्रों के समर्थन में उतरे अभिजीत दिपके! 📢 कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन को मिला समर्थन, बोले- मांग पूरी होने तक छात्रों के साथ खड़े हैं।

महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की विभिन्न ऑनलाइन परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों का समर्थन करने का ऐलान किया है। दिपके का कहना है कि CJP और वह खुद इस लड़ाई में MPSC अभ्यर्थियों के साथ खड़े हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक आयोग के शीर्ष अधिकारियों के इस्तीफे की मांग पूरी नहीं होती, तब तक छात्रों का साथ देने की बात जारी रहेगी।
छात्रों ने दिपके से की मुलाकात…..
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, MPSC की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के एक समूह ने छत्रपति संभाजीनगर के वालुज इलाके में अभिजीत दिपके से उनके घर पर मुलाकात की। छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक को लेकर अपनी चिंताएं उनके सामने रखीं। इसके बाद CJP की ओर से आंदोलन में शामिल होने का ऐलान किया गया। अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित पेपर लीक व अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई शामिल है। इन मुद्दों को लेकर महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन की खबरें सामने आई हैं।
24 सितंबर तक का अल्टीमेटम…..
CJP ने MPSC के अध्यक्ष और सचिव के इस्तीफे की मांग को लेकर 24 सितंबर तक की समयसीमा बताई है। पार्टी के मुताबिक, अगर इस अवधि तक मांग पूरी नहीं होती है तो अभ्यर्थियों से बातचीत करने और उनके मुद्दे उठाने के लिए राज्यव्यापी दौरा किया जाएगा। अभिजीत दिपके ने वीडियो संदेश में भी अभ्यर्थियों के साथ खड़े रहने की बात कही है। उनके इस ऐलान के बाद MPSC विवाद को लेकर चल रहे छात्रों के आंदोलन को नया राजनीतिक समर्थन मिला है।
MPSC विवाद क्यों बढ़ रहा है…..?
MPSC की कुछ ऑनलाइन परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोपों के बाद अभ्यर्थी परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। मामले को लेकर जांच की प्रक्रिया भी चर्चा में है। अब अभ्यर्थियों के आंदोलन में CJP के शामिल होने के ऐलान के बाद आने वाले दिनों में यह प्रदर्शन और व्यापक होने की संभावना है। पेपर लीक से जुड़े आरोपों की अंतिम स्थिति जांच और आधिकारिक निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट होगी।
