कोलंबो टेस्ट ड्रॉ होने के बाद मोहम्मद कैफ ने शुभमन गिल की कप्तानी पर सवाल उठाए।

भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो टेस्ट का नतीजा भारतीय टीम के लिए निराशाजनक रहा. मुकाबले के अंतिम दिन टीम इंडिया के पास जीत हासिल करने का मौका मौजूद था, लेकिन श्रीलंकाई बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों को विकेट के लिए तरसा दिया और मैच ड्रॉ कराने में कामयाब रहे. इस मुकाबले के बाद पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने टीम इंडिया की रणनीति का विश्लेषण किया. कैफ ने कप्तान शुभमन गिल के कुछ फैसलों पर सवाल उठाते हुए कहा कि बतौर कप्तान गिल को अभी काफी कुछ सीखना बाकी है. हालांकि, उन्होंने भारतीय टीम और खासकर ध्रुव जुरेल के प्रदर्शन से जुड़े सकारात्मक पहलुओं का भी जिक्र किया.
कैफ ने गिल की कप्तानी पर उठाए सवाल
मोहम्मद कैफ के मुताबिक शुभमन गिल अभी कप्तानी के मामले में पूरी तरह तैयार खिलाड़ी नहीं बने हैं. उनका मानना है कि गिल के पास सीखने और खुद को बेहतर करने के लिए काफी समय है, लेकिन कोलंबो टेस्ट में कुछ रणनीतिक फैसले सवालों के घेरे में रहे.
कैफ को सबसे ज्यादा हैरानी भारतीय गेंदबाजों के स्पेल को लेकर हुई. उनका मानना था कि जब पिच से गेंदबाजों को मदद मिल रही थी, तब उन्हें लगातार गेंदबाजी कराकर बल्लेबाजों पर दबाव बनाने की जरूरत थी. बार-बार गेंदबाजों को जल्दी बदलने से उनकी लय प्रभावित हो सकती है. टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज को लगातार एक ही गेंदबाज के खिलाफ खेलने के लिए मजबूर करना दबाव बनाने की रणनीति का अहम हिस्सा होता है. कैफ के अनुसार भारतीय टीम इस पहलू का फायदा उठाने में पूरी तरह सफल नहीं रही.
फील्डिंग को लेकर भी नाराज दिखे कैफ
कैफ ने भारतीय टीम की फील्ड सेटिंग को लेकर भी अपनी राय रखी. उनके अनुसार मुकाबले के अंतिम दिन पिच पर टर्न मौजूद था और ऐसे समय में कप्तान को ज्यादा आक्रामक फील्ड के साथ विकेट हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए थी. उनका मानना था कि जब टीम जीत के लिए खेल रही हो तो कुछ रन रोकने से ज्यादा जरूरी विकेट हासिल करना होता है. श्रीलंकाई बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाने के लिए स्लिप और आसपास के इलाकों में आक्रामक फील्डिंग रखी जा सकती थी. हालांकि टेस्ट क्रिकेट में फील्ड प्लेसमेंट परिस्थितियों, गेंदबाज की लाइन-लेंथ और बल्लेबाज की कमजोरी के आधार पर बदलती रहती है. लेकिन कैफ को लगा कि निर्णायक चरण में भारत की फील्डिंग में जरूरी आक्रामकता नहीं दिखी.
आखिरी दिन सिर्फ तीन विकेट मिलने से बिगड़ा खेल
कोलंबो टेस्ट के पांचवें दिन भारतीय टीम को मैच अपने पक्ष में करने के लिए श्रीलंका की दूसरी पारी जल्दी समेटनी थी. लेकिन मेजबान टीम के बल्लेबाजों ने संयम के साथ बल्लेबाजी की और भारतीय गेंदबाजों को ज्यादा मौके नहीं दिए.
भारत सिर्फ तीन विकेट हासिल कर सका. नतीजा यह हुआ कि मैच जीतने की उम्मीद धीरे-धीरे खत्म हो गई और मुकाबला ड्रॉ की ओर बढ़ गया. कैफ के अनुसार आखिरी दिन गेंदबाजों के साथ-साथ पूरी टीम की रणनीति में ज्यादा आक्रामकता की जरूरत थी. जब लक्ष्य जीत होता है तो कप्तान को विकेट लेने के लिए जोखिम उठाने पड़ते हैं.
सोनल दिनुशा के खिलाफ रणनीति पर भी सवाल
मोहम्मद कैफ ने श्रीलंका के बल्लेबाज सोनल दिनुशा के खिलाफ भारतीय टीम की योजना को लेकर भी सवाल उठाया. दिनुशा इससे पहले सीरीज में बड़ी पारी खेल चुके थे और कोलंबो टेस्ट में भी उन्होंने शानदार बल्लेबाजी जारी रखी. उन्होंने मुकाबले की दोनों पारियों में शतक लगाए. कैफ के मुताबिक ऐसे बल्लेबाज के खिलाफ भारतीय टीम को स्पष्ट रणनीति के साथ मैदान पर उतरना चाहिए था. उन्होंने गेंद की लेंथ को लेकर भी सवाल उठाए और माना कि बल्लेबाज को परेशान करने के लिए ज्यादा प्रभावी लाइन-लेंथ अपनाई जा सकती थी.
उनका तर्क था कि जब कोई बल्लेबाज पिछले मुकाबले में भी बड़ी पारी खेल चुका हो तो उसके खिलाफ गेंदबाजों को उसकी कमजोरियों के हिसाब से योजना बनानी चाहिए. कैफ को लगा कि इस मामले में भारतीय टीम अपेक्षित तैयारी के साथ नजर नहीं आई.
फॉलोऑन देने के फैसले को कैफ ने सही माना
मोहम्मद कैफ ने शुभमन गिल के हर फैसले को गलत नहीं बताया. उन्होंने श्रीलंका को फॉलोऑन देने के निर्णय को सही माना. फॉलोऑन देकर भारत ने मुकाबले में जीत हासिल करने का प्रयास किया और विपक्षी टीम को दोबारा बल्लेबाजी के लिए भेजा. इस फैसले से भारत के पास श्रीलंका के विकेट जल्दी हासिल करने और लक्ष्य का पीछा करने के लिए पर्याप्त समय बच सकता था. लेकिन इस रणनीति का फायदा तभी मिलता जब भारतीय गेंदबाज दूसरी पारी में नियमित अंतराल पर विकेट हासिल करते. आखिरी दिन विकेटों की कमी के कारण भारत की योजना सफल नहीं हो सकी.
मैदान पर विराट कोहली की कमी महसूस हुई?
कैफ ने अपनी चर्चा के दौरान विराट कोहली का भी जिक्र किया. उनका मानना था कि मुकाबले के मुश्किल दौर में मैदान पर विराट जैसे खिलाड़ी की ऊर्जा और आक्रामकता टीम के लिए मददगार हो सकती थी. टेस्ट मैच के दौरान जब विकेट नहीं मिलते और विपक्षी बल्लेबाज समय बिताने लगते हैं, तब खिलाड़ियों की बॉडी लैंग्वेज भी महत्वपूर्ण हो जाती है. कैफ के मुताबिक कोलंबो टेस्ट के आखिरी दिन भारतीय टीम में उस तरह की आक्रामक ऊर्जा नजर नहीं आई, जिसकी जरूरत थी.
ध्रुव जुरेल बने टीम इंडिया के लिए बड़ी उम्मीद
कोलंबो टेस्ट से भारतीय टीम को कुछ सकारात्मक चीजें भी मिलीं. इनमें सबसे प्रमुख नाम ध्रुव जुरेल का रहा. जुरेल ने मुकाबले में शानदार शतक लगाया और दबाव की स्थिति में अपनी बल्लेबाजी क्षमता दिखाई. कैफ ने भी उनके प्रदर्शन की तारीफ की.
जुरेल की बल्लेबाजी की खास बात यह रही कि उन्होंने परिस्थितियों के अनुसार अपने खेल को ढाला. वह सिर्फ आक्रामक शॉट खेलने के बजाय जरूरत के मुताबिक संयम के साथ भी बल्लेबाजी करते नजर आए. भारतीय टीम के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे प्रारूप में ऐसे खिलाड़ियों की जरूरत होती है जो दबाव में टिककर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा सकें.
गिल के लिए कप्तानी सीखने का दौर
शुभमन गिल के लिए कप्तानी की शुरुआत अभी सीखने का दौर है. एक बल्लेबाज के तौर पर उनका प्रदर्शन जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी कप्तान के रूप में रणनीतिक फैसले लेना भी है.
टेस्ट क्रिकेट में कप्तानी के दौरान गेंदबाजों के स्पेल, फील्ड प्लेसमेंट, विकेटकीपिंग की स्थिति और बल्लेबाज की कमजोरी के अनुसार लगातार बदलाव करने पड़ते हैं. एक टेस्ट मैच का नतीजा कई बार छोटे-छोटे फैसलों पर निर्भर करता है. कोलंबो टेस्ट से गिल और टीम मैनेजमेंट को इन्हीं पहलुओं पर काम करने का मौका मिला है.
मैच ड्रॉ, लेकिन टीम इंडिया को मिले अहम सबक
कोलंबो टेस्ट भले ही भारत की जीत के बिना समाप्त हुआ, लेकिन मुकाबले ने टीम की कुछ मजबूतियों और कमजोरियों को सामने ला दिया. भारतीय टीम को आगे गेंदबाजी रणनीति, आक्रामक फील्ड सेटिंग और दबाव के समय विकेट लेने की योजना पर ज्यादा ध्यान देना होगा. वहीं ध्रुव जुरेल का शतक टीम के लिए सकारात्मक संकेत है. शुभमन गिल के लिए भी यह मुकाबला कप्तानी के अनुभव में एक और अध्याय जोड़ता है. मोहम्मद कैफ की आलोचना को इसी संदर्भ में देखा जा सकता है. टेस्ट क्रिकेट में हर मुकाबला कप्तान और टीम के लिए सीखने का मौका होता है और कोलंबो टेस्ट ने भारतीय टीम को कई ऐसे सवाल दिए हैं, जिनके जवाब आने वाले मुकाबलों में मैदान पर दिखाई देने चाहिए.
