होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल-गैस सप्लाई को लेकर बड़ी राहत! ईरान और ओमान ने सुरक्षित शिपिंग कॉरिडोर बनाने का प्लान तैयार किया है।

ईरान और ओमान के बीच बातचीत के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को लेकर राहत की उम्मीद बढ़ी है. दोनों देश अस्थायी संयुक्त नेविगेशन कॉरिडोर बनाने पर काम कर रहे हैं…..
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. ईरान और ओमान ने इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही को फिर से शुरू करने के लिए एक अस्थायी संयुक्त नेविगेशन कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है. अगर यह व्यवस्था प्रभावी होती है तो तेल और गैस की सप्लाई को लेकर बनी चिंताओं में कमी आ सकती है.
ईरान-ओमान ने रखा अस्थायी कॉरिडोर का प्रस्ताव…..
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान और ओमान होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करने के लिए एक अस्थायी संयुक्त नेविगेशन कॉरिडोर पर बातचीत कर रहे हैं. इसका उद्देश्य समुद्री जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना है. इसके अलावा संभावित समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए संयुक्त अभियान चलाने की योजना पर भी चर्चा हो रही है. हालांकि, इन व्यवस्थाओं को अभी होर्मुज जलडमरूमध्य के पूरी तरह सामान्य होने का आधिकारिक ऐलान नहीं माना जा सकता.
क्या पूरी तरह खुल जाएगा होर्मुज…..?
फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी कि होर्मुज पूरी तरह सामान्य हो गया है. ईरान और ओमान के बीच आगे भी इस समुद्री मार्ग को लेकर बातचीत जारी रहने की बात सामने आई है. प्रस्तावित व्यवस्था में जहाजों की आवाजाही का प्रबंधन, जरूरी सूचनाओं का आदान-प्रदान, नेविगेशन और सुरक्षा सेवाओं जैसी व्यवस्थाएं शामिल हो सकती हैं. इसका उद्देश्य समुद्री यातायात को धीरे-धीरे सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से बहाल करना है.
तेल और गैस सप्लाई के लिए क्यों अहम है होर्मुज…..?
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा कारोबार के लिए बेहद अहम समुद्री रास्ता है. खाड़ी क्षेत्र से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग बाजारों तक पहुंचती है. ऐसे में अगर इस मार्ग पर लंबे समय तक जहाजों की आवाजाही प्रभावित रहती है तो अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है. इसका असर कच्चे तेल की कीमतों और तेल आयात करने वाले देशों की लागत पर भी पड़ सकता है. हाल के दिनों में होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या सामान्य स्तर से काफी कम रही है. मंगलवार को केवल पांच कमोडिटी जहाजों के इस रास्ते से गुजरने की बात सामने आई, जबकि इससे पहले करीब 10 दिनों में रोजाना औसतन 15 जहाज निकल रहे थे.
कच्चे तेल की कीमतों को मिली राहत…..
ईरान और ओमान के बीच बातचीत से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बाजार की चिंता कुछ कम हुई है. इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी देखने को मिली. अगर आने वाले दिनों में जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य होती है और तेल-गैस की सप्लाई बहाल होती है, तो इसका फायदा भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों को मिल सकता है. सप्लाई की स्थिति बेहतर होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद की जा सकती है.
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर…..?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है. ऐसे में पश्चिम एशिया के समुद्री रास्तों में किसी भी तरह की बड़ी रुकावट का असर वैश्विक तेल बाजार के साथ-साथ भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है. फिलहाल ईरान और ओमान की पहल से राहत की उम्मीद जरूर बढ़ी है, लेकिन होर्मुज में स्थिति पूरी तरह सामान्य होने के लिए आगे की बातचीत और जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था का सफल होना महत्वपूर्ण रहेगा…..
