'सवाल करो, गुलामी नहीं' — PM मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर अभिनेता प्रकाश राज ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने सरकारी स्कूलों की सुविधाओं और सरकार की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाए।

अभिनेता प्रकाश राज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में दिए गए ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्रकाश राज ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए सरकार पर सवाल उठाए और लोगों से बिना सवाल किए किसी का समर्थन नहीं करने की अपील की। उनका बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
प्रकाश राज ने क्या कहा….?
प्रकाश राज ने 16 अगस्त की शाम अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर एक वीडियो शेयर किया। इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार से जवाबदेही को लेकर सवाल पूछने वालों को अलग-अलग नाम दिए जा रहे हैं। अभिनेता ने दावा किया कि सवाल करने वाले लोगों को पहले ‘अर्बन नक्सल’, ‘विकास विरोधी’ और दूसरे नामों से संबोधित किया गया और अब ‘दिमागी नक्सल’ कहा जा रहा है। इसके बाद प्रकाश राज ने सरकारी स्कूलों की स्थिति का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को ऐसे नामों से संबोधित किया जा रहा है, वे गांव-गांव जाकर सरकारी स्कूलों में खराब सुविधाओं, टॉयलेट, क्लासरूम, शिक्षकों और सड़कों से जुड़ी समस्याओं को सामने ला रहे हैं।
‘दिमागी बनो, अंधभक्त नहीं’….
प्रकाश राज ने अपने वीडियो में लोगों से सवाल पूछने की अपील करते हुए कहा कि नागरिकों को सोचने-समझने वाला होना चाहिए और बिना सवाल किए किसी का समर्थन नहीं करना चाहिए। उन्होंने अपने संदेश में ‘दिमागी बनो, बेवकूफ नहीं… अंधभक्त नहीं। सवाल करो, गुलामी नहीं’ जैसी बात कही। उन्होंने सरकार से लाल किले के मंच का इस्तेमाल राजनीतिक नामकरण के बजाय देश के वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देने की अपील भी की।
सरकारी स्कूलों का मुद्दा उठाया….
प्रकाश राज ने अपने वीडियो में सरकारी स्कूलों की सुविधाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने साफ-सफाई, टॉयलेट, शिक्षकों और क्लासरूम जैसी बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देने की बात कही। अभिनेता ने कहा कि बच्चों के भविष्य के लिए सरकारी स्कूलों में बेहतर माहौल उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उनका यह बयान प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस भाषण के बाद सामने आया, जिसमें ‘दिमागी नक्सल’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।
PM मोदी ने ‘दिमागी नक्सल’ को लेकर क्या कहा था….?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए नक्सलवाद का जिक्र किया था। अपने भाषण में पीएम मोदी ने कहा कि जंगलों में हथियार उठाने वाले नक्सलवादियों के खिलाफ कार्रवाई के बावजूद ‘दिमागी नक्सल’ अब भी मौके की तलाश में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोग हिंसा के तरीके तलाश रहे हैं और देश को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने की बात कही। इसी बयान के बाद ‘दिमागी नक्सल’ शब्द राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया और विपक्षी नेताओं के साथ-साथ कुछ सार्वजनिक हस्तियों ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी।
बयान पर क्यों छिड़ी बहस….?
प्रधानमंत्री के बयान को जहां सरकार की ओर से नक्सलवाद और हिंसक विचारधारा के खिलाफ कड़ा संदेश माना जा रहा है, वहीं आलोचक इसे सरकार से सवाल पूछने वाले लोगों को निशाना बनाने वाली भाषा के तौर पर देख रहे हैं। प्रकाश राज ने भी इसी संदर्भ में सवाल पूछने और सरकार की जवाबदेही तय करने की बात कही है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि प्रधानमंत्री के बयान और प्रकाश राज की प्रतिक्रिया दोनों अपने-अपने राजनीतिक और वैचारिक संदर्भ में दिए गए बयान हैं। इन पर अलग-अलग राजनीतिक पक्षों की अलग-अलग व्याख्या हो सकती है।
सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज….
प्रकाश राज के वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग अभिनेता के सवालों का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स प्रधानमंत्री के बयान के पक्ष में नजर आ रहे हैं। फिलहाल ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी और उस पर प्रकाश राज की प्रतिक्रिया ने एक बार फिर सरकार की जवाबदेही, नागरिकों के सवाल और राजनीतिक भाषा को लेकर बहस को तेज कर दिया है।
