
नई दिल्ली, 9 फरवरी
योगासन भारत की प्राचीन परंपरा का अहम हिस्सा है, जो शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है। इन्हीं योगासनों में से एक है विपरीतकरणी मुद्रा, जो पाचन तंत्र को मजबूत करने से लेकर थायरॉयड को नियंत्रित रखने में सहायक मानी जाती है। विपरीतकरणी मुद्रा योगासन की एक प्रभावी तकनीक है, जो पाचन से लेकर थायरॉयड तक शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करती है।
मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, विपरीतकरणी मुद्रा में पैरों को दीवार की ओर ऊपर उठाकर शरीर को उल्टी स्थिति में रखा जाता है। यह मुद्रा शरीर में प्राण ऊर्जा को ऊपर की ओर प्रवाहित करती है और गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से कई अंगों को लाभ पहुंचाती है।
पाचन तंत्र को बनाती है मजबूत
विशेषज्ञों के मुताबिक, विपरीतकरणी मुद्रा के नियमित अभ्यास से पाचन क्रिया बेहतर होती है। यह पेट के अंगों की मालिश करती है, जिससे भोजन आसानी से पचता है। कब्ज की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए यह योगासन काफी प्रभावी माना जाता है, क्योंकि इससे आंतों में रक्त संचार बढ़ता है।
मानसिक तनाव और चिंता में राहत
यह मुद्रा मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद है। इसके अभ्यास से दिमाग शांत रहता है, एकाग्रता बढ़ती है और तनाव व चिंता में कमी आती है। नियमित योग अभ्यास व्यक्ति को मानसिक रूप से संतुलित और ऊर्जावान बनाता है।
त्वचा और बालों के लिए लाभकारी
विपरीतकरणी मुद्रा से चेहरे और सिर में रक्त प्रवाह बढ़ता है, जिससे त्वचा को भरपूर पोषण मिलता है। इससे त्वचा में निखार आता है और बाल मजबूत व चमकदार बनते हैं। बालों से जुड़ी समस्याओं में भी यह योगासन सहायक माना जाता है।
थायरॉयड को नियंत्रित करने में सहायक
इस योग मुद्रा का एक बड़ा फायदा थायरॉयड ग्रंथि पर पड़ता है। गर्दन के क्षेत्र में रक्त संचार बढ़ने से थायरॉयड बेहतर तरीके से काम करता है। हाइपोथायरॉयडिज्म जैसी समस्याओं में विपरीतकरणी मुद्रा उपयोगी साबित हो सकती है।
अभ्यास से पहले सावधानी जरूरी
योग विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआत में 5–10 मिनट तक ही अभ्यास करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। गर्भवती महिलाएं, हाई ब्लड प्रेशर या किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोग डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही इसका अभ्यास करें।
