🇺🇸 अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने लगातार पांचवीं बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। जानिए इस फैसले का भारत के शेयर बाजार, रुपये और लोन पर क्या असर पड़ सकता है।

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) ने अपनी ताजा मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। फेड ने अपनी बेंचमार्क ब्याज दर 3.50% से 3.75% के दायरे में बरकरार रखी है। यह लगातार पांचवीं बैठक है, जिसमें ब्याज दरों को स्थिर रखा गया है। फेड के इस फैसले का असर सिर्फ अमेरिकी अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत समेत वैश्विक बाजारों पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
फेड ने ब्याज दरें क्यों नहीं बढ़ाईं?
फेडरल रिजर्व का कहना है कि वह महंगाई पर लगातार नजर बनाए हुए है। अमेरिका में मुद्रास्फीति अभी भी केंद्रीय बैंक के 2% लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए फेड फिलहाल किसी जल्दबाजी में फैसला नहीं लेना चाहता। बैंक का मानना है कि आर्थिक स्थिरता और महंगाई नियंत्रण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
भारत पर क्या होगा असर?
1. शेयर बाजार को मिल सकती है राहत….
फेड द्वारा ब्याज दरें स्थिर रखने से विदेशी निवेशकों का भरोसा उभरते बाजारों में बना रह सकता है। इससे भारतीय शेयर बाजार में बड़ी बिकवाली की आशंका कम हो सकती है और निवेशकों का सेंटीमेंट सकारात्मक रह सकता है।
2. रुपये पर दबाव कम रहेगा….
अगर अमेरिका ब्याज दरें बढ़ाता, तो डॉलर मजबूत हो सकता था और विदेशी निवेश भारत से निकल सकता था। लेकिन दरें स्थिर रहने से भारतीय रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की संभावना कम हुई है।
3. RBI पर तुरंत दबाव नहीं….
अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी होने पर कई बार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को भी महंगाई और रुपये को संभालने के लिए सख्त रुख अपनाना पड़ता है। फिलहाल फेड के फैसले से RBI पर तत्काल ब्याज दर बढ़ाने का दबाव कम रहेगा।
4. लोन लेने वालों के लिए राहत….
यदि वैश्विक ब्याज दरें तेजी से बढ़तीं, तो भारत में भी होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज महंगे होने की संभावना बढ़ सकती थी। फिलहाल फेड के फैसले से ऐसी आशंकाओं को कुछ राहत मिली है।
तेल की कीमतों पर बनी रहेगी नजर….
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। यदि तेल महंगा होता है, तो परिवहन लागत बढ़ेगी और इसका असर महंगाई पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि फेड भविष्य के आर्थिक संकेतकों पर लगातार नजर बनाए हुए है।
आगे क्या हो सकता है?
अब निवेशकों की नजर फेड की अगली मौद्रिक नीति बैठक और अमेरिका में महंगाई, रोजगार तथा आर्थिक विकास के आंकड़ों पर रहेगी। यदि महंगाई में अपेक्षित कमी नहीं आती है, तो आने वाले महीनों में फेड अपनी नीति पर दोबारा विचार कर सकता है।
निष्कर्ष….
फिलहाल अमेरिकी फेडरल रिजर्व का ब्याज दरें स्थिर रखने का फैसला भारत के लिए राहत भरी खबर माना जा सकता है। इससे शेयर बाजार, रुपये और लोन बाजार में तत्काल स्थिरता बनी रहने की संभावना है। हालांकि, वैश्विक महंगाई, कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक घटनाक्रम आगे की दिशा तय करेंगे।
