संसदीय समितियों का नया सेटअप! शशि थरूर फिर विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष बने, जबकि कई सांसदों को दोबारा जिम्मेदारी मिली। जानिए किसे कौन सा पद मिला।

लोकसभा और राज्यसभा की विभाग-संबंधी स्थायी समितियों का नए कार्यकाल के लिए पुनर्गठन किया गया है। शशि थरूर को विदेश मामलों की समिति की अध्यक्षता फिर मिली है, जबकि कई अन्य सांसद भी अपनी समितियों के अध्यक्ष पद पर बरकरार रहे हैं।
नई दिल्ली में संसद की विभाग-संबंधी स्थायी समितियों के पुनर्गठन के बाद कई सांसदों को एक बार फिर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। 3 अक्टूबर 2026 को हुए इस पुनर्गठन में कांग्रेस सांसद शशि थरूर को विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति का अध्यक्ष बनाए रखा गया है। संसद की इन समितियों में अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों से जुड़े कामकाज, नीतियों और बजटीय मामलों की समीक्षा की जाती है। Digital Sansad के अनुसार विभाग-संबंधी 24 स्थायी समितियां हैं और प्रत्येक में लोकसभा के 21 तथा राज्यसभा के 10 सदस्य होते हैं। इन समितियों का कार्यकाल एक वर्ष से अधिक नहीं होता।
शशि थरूर को फिर विदेश मामलों की जिम्मेदारी…..
तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर को एक बार फिर विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। इस समिति का संबंध विदेश मंत्रालय से जुड़े मामलों और भारत की विदेश नीति से संबंधित विषयों की संसदीय समीक्षा से है। थरूर इससे पहले भी इस समिति की अध्यक्षता कर चुके हैं। उपलब्ध संसदीय रिकॉर्ड में 2026 में उनके नेतृत्व में समिति की रिपोर्टें सदन में पेश किए जाने का रिकॉर्ड भी मौजूद है।
संजय कुमार झा भी अध्यक्ष पद पर बरकरार…..
जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा को परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी संसदीय समिति की अध्यक्षता फिर दी गई है। संसद के रिकॉर्ड में 2026 के दौरान इस समिति के अध्यक्ष के रूप में संजय कुमार झा का नाम दर्ज है। समिति ने पर्यटन क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर भी रिपोर्ट पेश की थी।
अनुराग ठाकुर को भी मिली दोबारा जिम्मेदारी…..
पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर को कोयला, खान और इस्पात संबंधी संसदीय समिति का अध्यक्ष बनाए रखा गया है। इस तरह नए पुनर्गठन में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से जुड़े कई सांसदों को पहले से संभाली जा रही समितियों की जिम्मेदारी दोबारा मिली है।
कीर्ति आजाद की जगह काकोली घोष दस्तीदार…..
पुनर्गठन में तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़ा बदलाव भी देखने को मिला। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार रसायन और उर्वरक संबंधी समिति की अध्यक्षता में बदलाव किया गया है और काकोली घोष दस्तीदार को यह जिम्मेदारी दी गई है। यह बदलाव TMC सांसद कीर्ति आजाद के पहले इस समिति की अध्यक्षता करने के बाद हुआ है।
इन सांसदों को भी मिली जिम्मेदारी…..
नए पुनर्गठन में कई अन्य सांसदों को भी समितियों की अध्यक्षता सौंपी गई या उन्हें पद पर बरकरार रखा गया है। इनमें प्रमुख नाम हैं :-
- निशिकांत दुबे — संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी समिति
- चरनजीत सिंह चन्नी — कृषि संबंधी समिति
- राम गोपाल यादव — स्वास्थ्य और परिवार कल्याण संबंधी समिति
- मुकुल वासनिक — शिक्षा, महिला, बाल और युवा मामलों से संबंधित समिति
- तिरुचि शिवा — उद्योग संबंधी समिति
- सुधांशु त्रिवेदी — वाणिज्य संबंधी समिति
इनमें से चरनजीत सिंह चन्नी और शशि थरूर जैसे विपक्षी सांसदों को महत्वपूर्ण समितियों में अध्यक्ष पद पर बनाए रखने की जानकारी भी सामने आई है।
क्या करती हैं संसदीय स्थायी समितियां…..?
संसदीय स्थायी समितियां संसद के कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये संबंधित मंत्रालयों और विभागों के बजट, नीतियों और विभिन्न विधायी मामलों की जांच करती हैं तथा अपनी सिफारिशें संसद के सामने रखती हैं। Digital Sansad के मुताबिक विभाग-संबंधी स्थायी समितियां केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों को अपने दायरे में कवर करती हैं। इनके जरिए संसद को सरकारी कामकाज की विस्तृत समीक्षा करने का अवसर मिलता है। नए पुनर्गठन के बाद अब अलग-अलग समितियां अपने संबंधित मंत्रालयों और विषयों से जुड़े कामकाज की संसदीय समीक्षा जारी रखेंगी।
